– ‍हरिराम पाण्डेय

बंगाल के चलतीवादी समाज में न्याय, बरोबरी आ लोकतत्र ला कवनो जगहा नइखे. सत्ता दखलियावे के तकोनिया लड़ाई में कइसन कइसन खतरनाक बारूदी सुरंग पड़ल बाड़ी सँ एकर अंदाजा केहु के नइखे. एकर जवन नमूना पिछला मंगल का दिने देखे के मिलल ऊ कवनो अचके में भइल घटना ना रहुवे. सत्ता बर्दाश्त ना करे, ई त सभे जानेला बाकिर चलतीवादी सत्ता कतना खतरनाक होले, बंगाल में लगातार होखत राजनीतिक हिंसा एकरा के बेर बेर साबित करेले. मंगल का दिने नयी दिल्ली में वामपंथी छात्र संगठन एस एफ आई के कार्यकर्ता अपना नेता ऋतुब्रत बनर्जी का मौजूदगी में पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री अमित मित्रा से मारपीट आ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का खिलाफ प्रदर्शन कइले, तृणमूल के नेता लोग के कहना बा कि ओ दिन ममता बनर्जी के जान मारे के साजिश रहल. एसएफआई नेता लोग के कहना बा कि एक हफ्ता पहिले पुलिस कार्रवाई से कोलकाता में एसएफआई नेता सुदीप्तो गु्प्ता के मौत से उपजल खीस के अभिव्यक्ति रहल दिल्ली के घटना. एतने ना सुदीप्तो के मौत के मुख्यमंत्री साधारण घटना बतवले रही, एहु से कार्यकर्ता बहुते नाराज रहलें.

mamta-banerjeeममता बनर्जी अपना राज्य के योजना खातिर खरच हासिल करे पाँच दिन के दौरा पर दिल्ली गइल रही आ मुख्यमंत्री आ वित्तमंत्री का साथे अनेके सांसद आ नेतो लोग गइल रहुवे. मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में प्रधानमंत्री आ वित्तमंत्री से भेंटो करे के रहल बाकिर बिना केहु से भेंट कइले ऊ वापिस लवट अइली. एने बंगाल में दिल्ली के घटना के बड़हन असर भइल आ राज्य भर में माकपा के कार्यालयन पर हमला होखे लागल. हालात बहुते खतरनाक मोड़ लेत लउकत बा. तृणमूल नेता लोग बुध का दिने “धिक्कार दिवस” मनावे के एलान कर के आग अउरी लहका दिहल. ममता बनर्जी आ कुछ अउर बड़का नेता शांति बनावे रखला के गोहार लगवले बाड़े बाकिर ओकर कवनो असर होखत ना लउकल आ बुध का दिने माकपा पोलित ब्यूरो एगो बइठका कर के मुख्यमंत्री से गोहार कइलसि कि ऊ हिंसा रोकसु. बयान में कहल गइल कि पार्टी दिल्ली घटना के नकार दिहले बिया आ ओकर निंदा कइले बिया. पार्टी देखी कि घटना भइल कइसे. बाकिर एह घटना के बहाना बना के पश्चिम बंगाल में माकपा आ वामपंथियन का खिलाफ बहुते हिंसा कइल जात बा, हालांकि ममता बनर्जी वामपंथियन का खिलाफ हिंसा के खबरन के खारिज क दिहली आ एकरो ला माकपा के जिम्मेदार ठहरवली. बंगाल खातिर ई कवनो नया बात नइखे. अलबत्ता दिल्ली में अइसन घटना बहुत कुछ कहत बा. पश्चिम बंगाल के राज्यपाल एम के नारायणन मुख्यमंत्री आ वित्त मंत्री पर भइल हमलन के भारत के लोकतांत्रिक भावना का खिलाफ बतावत कहले कि अइसन होखे के उमेद ना रहल. घटना के कड़ेर निंदा करे लायक बतावत राज्यपाल कहलन कि माकपा पोलित ब्यूरो के एह ला सार्वजनिक रूप से माफी माँगे के चाहीं.

राजनीति के भाषा कतना हिंसक हो सकेले एकर नमूना बंगाल के अखबारन आ टीवी चैनल पर रोजे देखे के मिलत बा. तृणमूल आ माकपा के लोग सड़क पर फरियावे में लागल बा. वामोमोर्चा आपन भुलाइल जमीन वापिस पावे पर आँख गड़वले बाड़ें. हमला, जवाबी हमला, जुलूस, जवाबी जुलूस के दौर रोज रोज के बात हो गइल बा आ विधानसभा चुनावन का बाद शुरू भइल राजनीतिक लड़ाई आपन जोर देखावे आ जनाधार छीने के खेल बन गइळ बा, एहमें जनता से कवनो सरोकार हइए नइखे.

हँ, राजनीति के कुछ विश्लेषक कहत बाड़ें कि एह नया हालात से पंचायत चुनाव में ममता के बहुते फायदा मिली. अइसन होइओ सकेला बाकिर पंचायत चुनाव में तृणमूल के हालत पहिलहुं बहुत बढ़िया रहल आ अगर कवनो अउर फायदा होखबो करी त नामे भर के काहे कि पार्टी के कमिटेड समर्थक त ओहिजे रहीहें आ बाकी पहिलहीं ममता के साथे रहलें. एहसे पहिले वामपंथी राजो में अइसने होत रहे आ आजु जब तृणमूल सत्ता में बिया तबहियों इहे होत बा. फरक बस अतने बा कि पहिले लड़ाई के मैदान बंगाल के बहरी ना जात रहे आ आजु ज बंगाल के बहरिओ होखे लागल बा त हालात बेकाबू होखे के अनेसा बढ़ गइल बा. काहे कि माकपा देश भर में आपन मौजूदगी आ कैडरन का बल पर राज्य से बहरी हर जगहा तृणमूल ला कपरबथी बन सकेले. ओने अपना बेकाबू खीस का चलते ममता राज्य में ओकर कसर निकलीहें. ममता में जवन सबले बड़का कमी ह ऊ ह कि ऊ अपना खीस पर काबू ना कर पावसु आ ना ही आपन विरोध बर्दाश्त कर सकेली. साधारण कार्टून पर ओकरा के बनावे वाला के पुलिस के हवाले कर देबे आ गड़े वाला सवाल पर टीवी के लाइव शो छोड़ के निकल जाए वाली ममता बुध का दिने जब दिल्ली से कोलकाता चहुँपली त सीधे अस्पताल चल गइली. उनकर ब्लड प्रेशर बहुते कम हो गइल बा आ उ बहुते तनाव में बाड़ी.

नंदीग्राम के पहिले कबो वइसन ना भइल हिंसा का बुनियाद पर बदलाव के किला बनावल गइल त वाममोर्चा के पैंतीस साल पुरान किला के बुनियाद में मरीच झाँपी जइसन नरसंहार के गूंज बा. राजनीतिक हिंसा में नक्सली दौर से लगाइत अबले रोजाना कवनो ना कवनो गोल के समर्थक के मरइला के अनसुलझल घटना बाड़ी सँ. केशपुर, नानुर से लिहले ना जाने कतना नरसंहार बाड़ी सँ, त अउरी खून खराबा के रोक सकेला. राज्य में पंचायत चुनाव कपारे पर बा. भूख आ बेरोजगारी से जूझत राज्य में कारोबार, धंधा, उद्योग राजनीतिक हिंसा के शिकार हो गइल बा. किसान खुदकुशी करत बाड़ें. प्रतिभा बाहर जात बा. मानवाधिकार हनन के कवनो सुनवाई नइखे होखत, छुआछूत, भेदभाव, नफरत के अभियान जारी बा. लोग बहुते खराब तरीका से अपना अपना गोल से जुड़ल बाड़ें. सेवा आ संस्थानो में राजनीति के असर बा. समाज आ सड़क पर के अपराधी राजनीति में झंडाबरदार बाड़े आ आम आदमी कतहीं सुरक्षित नइखे. त जनप्रतिनिधिनो तक एकर आँच त पहुँचही के रहल.

अर्थव्यवस्था के कवनो अस्तित्वे नइखे. निवेश के माहौल नइखे. साँच कहीं त एहिजा राजनीति छोड़ दोसर कुछ संभव नइखे. सामाजिक समरसता त हइले नइखे. राजनीतिक आ फिरकावाराना गोलबंदी में उत्पादन प्रणाली आ आजीविका के घनघोर संकट बा. राजनीति अब दबाइल नफरत आ हिंसा के नाम हो गइल बा. दुनिया भर में शहरी आबादी बढ़त बा बाकिर कोलकाता अकेला शहर हो गइल बा जवना के आबादी घटत बा. परइला का अलावे एह दमघोंटू हिंसक माहौल से बाचे के कवनो उपाय नइखे, जहाँ प्रकृति आ पर्यावरणो में राजनीति बोलेले. दुर्गापूजा के सांस्कृतिक माने वाला बंगाल अब अपना हर विरोधी के असुर मानेला. ई एगो अइसन वधस्थल बन गइल जहाँ सभे सभ केहु के खातिर जानलेवा बन गइल बा. एह माहौल में काल्हु के बंगाल कहाँ जाई आ ओकर का होखी एकर सहजे अंदाज लगावल जा सकेला.
(११ अप्रेल २०१३)


पाण्डेय हरिराम जी कोलकाता से प्रकाशित होखे वाला लोकप्रिय हिन्दी अखबार “सन्मार्ग” के संपादक हईं आ उहाँ के ब्लॉग ह खोज खबर

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