PresidentPranabसाथी नागरिक सभे,

1. आजादी के छियासठवाँ सालगिरह पर रउरा सभे के आ दुनिया भर में रहे वाला भारतीयन के हार्दिक बधाई देत बानी.

2. सबले पहिले हमार धेयान राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी का ओर जात बा जे हमनी के आजादी के लड़ाई के मूर्त रुप दिही आ शहीदन ओर जे हमनी के देश के आजादी ला सबले बड़ बलिदान दिहलें, आ महान देशभक्तन पर जे दू सौ साल के गुलामी का खिलाफ अथक लड़ाई लड़ के हमनी के मातृभूमि के आजाद करवले. महात्मा गाँधी विदेशी शासन आ ढेर दिन से समाज के जकड़ले बन्हन दुनु से आजादी दिअवलें. उ हर हिन्दुस्तानी के अपना पर भरोसा राखे आ बेहतर भविष्य के उमेद राखे का राह पर चलवले. सहनशीलता आ आत्म संयम पर आधारित स्वराज के वादा कइलन गाँधीजी. उ वंचना आ जरूरी चीझन के कमी से मुक्ति दिआवे के वादा कइलन. लगभग सत्तर साल से हमनी का अपना भाग्य के मालिक बनल बानी सँ. एहसे ई मौका बा अपना से सवाल करे के कि का हमनी का सही दिशा में बढ़त बानी? गाँधीजी के दृष्टि वास्तविकता में ना बदलल जा सकी अगर हमनी का ओह मूल्यन के अनदेखी करब जवन उनका सोच के जरूरी तत्व रहुवे प्रयास के गंभिरता, लक्ष्य के ईमानदारी, आ समहर के भलाई ला बलिदान.

3. हमनी के पुरखा कालोनी बनल दुनिया का रेगिस्तान में लोकतंत्र से सींचात पहिलका सोता बनवलन. हर पाँच साल पर वोट के अधिकार से अधिका होला लोकतंत्र. एकर सारतत्व ह जनता के मनसा, एकर भावना नेतृत्व के जिम्मेदारी पर आ हर नागरिक के कर्तव्य पर हर दिन असर डाले वाला होखल जरुरी होला. सजग आ जियतार संसद, आजाद न्यायपालिका, जिम्मेदार मीडिया, सतर्क सिविल सोसाइटी आ नैतिकता आ परिश्रम ला प्रतिबद्ध कार्यपालिका से लोकतत्र जिएला. ई जिम्मेदारी सकारे वाला होला, बेहिसाब भोग वाला ना. आ एकरा बावजूद हमनी का निजी लाभ, आत्ममोह, असहनशीलता, बेवहार में छोटहपन, आ प्राधिकारी ला अपमानभाव से अपना कार्यसंस्कृति के बिगड़े दिहले बानी जा. समाज के नैतिकसत्व में गिरावट के सबले बड़का असर नवहियन आ गरीबन के आकांक्षा आ उमीद पर पड़ल बा. महात्मा गाँधी हमनी के, उनुके शब्द दोहरावत बानी, सिद्धांत का बिना राजनीति, काम का बिना धन, बिना नीति के आनंद, चरित्र का बिना ज्ञान, नैतिकता बिना व्यापार, मानवता बिना विज्ञान, आ बलिदान बिना पूजा से बाचे के कहले रहीं. आधुनिक लोकतंत्र बनावत घरी उहाँ के सलाह पर हमनी के धेयान देबे पड़ी देशभक्ति, सहानुभूति, सहनशीलता, आत्मसंयम, ईमानदारी, अनुशासन आ नारी सम्मान के आदर्श के जियतार बल बनावे होखी.

साथी नागरिक सभे,

4. संस्थान राष्ट्रीय चरित्र के आइना होलें. आजु हमनी का चारो ओर अविश्वास अउर सरकार आ संस्थानन के काम से निराशाभाव पसरल बा. हमनी के विधायिका विधान बनावे वाला मंच का बदले लड़ाई के मैदान बुझात बाड़ी सँ. भठियरपन एगो बड़हन चुनौतौ बन गइल बा. राष्ट्र के संसाधन उदासीनता आ भोग का चलते बरबाद होखत बा. ई हमनी के समाज के गतिशीलता रोकत बा. एह गिरावट के रोकला के जरूरत बा.

5. हमनी के संविधान राज्य के अलग अलग संस्थान का बीच सत्ता के एगो महीन संतुलन बनावेला. एह संतुलन के बचवले राखे के जरूरत बा. हमनी के अइसन संसद चाहीं जहवाँ संवाद होखत होखे, तर्क आ फैसला होखत होखे. हमनी के अइसन न्यायपालिका चाहीं जे बिना देरी कइले न्याय देव. हमनी के अइसन नेतृत्व चाहीं जे राष्ट्र का प्रति आ हमनी के सभ्यता के महान बनावे वाला मूल्यन खातिर समर्पित होखे. अइसन राज चाहीं जे हमनी में हमनी के सोझा खाड़ चुनौतियन से निपटे के भरोसा पैदा करे. हमनी के अइसन मीडिया आ नागरिक चाहीं जे अपना अधिकार जतावत घरी अपना जिम्मेदारियो ला प्रतिबद्ध होखे.

साथी नागरिक सभे,

6. शिक्षा व्यवस्था से समाज के फेर से व्यवस्थित कइल जा सकेला. बिना एको विश्वस्तर के विश्वविद्यालय के हमनी का विश्वशक्ति बने के सोच ना सकीं. इतिहास गवाह बा कि हमनी का कबो शिक्षा का मामिला में दुनिया में विलक्षण रहीं जा. तक्षशिला, नालन्दा, विक्रमशीला, वलाभी, सोमापुर आ उदन्तपुरी पुरनका विश्वविद्यालयी व्यवस्था के अंग रहले जवन छठवीं शताब्दी से अठारह सौ साल ले पूरा दुनिया पर हावी रहुवे. दुनिया भर के विद्वान आ महान मस्तिष्क खातिर ई चुंबक जस रहली सँ. हमनी के फेर से उहे जगहा काबिज होखे के कोशिश करे के पड़ी. विश्वविद्यालय बरग के पेड़ जस होला जवना के जड़ प्राथमिक शिक्षा में, हमनी के समुदाय के विद्वता शक्ति बनावे वाला विद्यालयन के एगो बड़हन तंत्रजाल में होला. ज्ञान के एह पेड़ के हर हिस्सा में, बीज, सोर आ डाढ़ से लगाइत सबले उचका फुनगी ले, निवेश कइला के जरूरत बा.

साथी नागरिक सभे,

7. सफल लोकतंत्र आ सफल आर्थिक व्यवस्था में सीधा नाता बा काहे कि हमहन का आबादी से चले वाला राष्ट्र हईं जा. लोग जब पंचायत से लगाइत स्थानीय शासन में हिस्सेदारी करेला तब उ लोग आपन हित बढ़िया से साधेला. हमनी के स्थानीय प्रशासन के जल्दी से कार्यशील, कार्यकारी, आ धनयुक्त बना के शक्तिसंपन्न बनावे के पड़ी. तेज विकास हमनी के संसाधन दे दिहले बा बाकिर अधिका साधन अधिका बढ़िया परिणाम में नइखे बदलत. समहर शासन बिना समहर विकास ना पावल जा सके.

8. सवा सौ करोड़ के आबादी वाला बढ़त देश खातिर विकास आ वितरण वाला संवाद बहुते जरूरी होला. विकास जहाँ वितरण के संभावना बनावेला आ पुनर्वितरण आवे वाला समय में बढ़न्ती के वाहक होला. दुनु ओतने जरूरी होला. दोसरा के नुकसान चहुँपा के कवनो एक पर अधिका जोर राष्ट्र खातिर खराब हालात पैदा कर सकेला.

9. पिछला दशक भारत के सबसे तेज गति से बढ़े वाला देश बनत देखले बा. एह दौरान हमनी के अर्थव्यवस्था हर साल 7.9 फीसदी के औसत से बढ़ल बा. आजु हमनी का अनाज उपजावे में आत्मनिर्भर बानी, हमनी का दुनिया में चावल के सबले बड़का आ गेंहू के दुसरा नंबर के निर्यातक देश हईं. एह साल दाल के 18.45 मिलियन टन के रिकार्ड उत्पादन दाल में आत्मनिर्भरता ला बढ़िया संगुन बा. कुछ साल पहिले ले ई सोचलो मुश्किल रहुवे. एह वेग के बनवले राखे के जरुरत बा. एह ग्लोबल दुनिया में अझुराइल आर्थिक हालात में विपरीत हालात से, बाहरी आ भितरी दुनु, जूझल सीखल जरूरी बा.

साथी नागरिक सभे,

10. आजादी का शुरुआत में हमनी का आधुनिकता आ बरोबरी वाला आर्थिक विकास के दमकत दीया जरवनी जा.एह दीया के दमकत राखे खातिर गरीबी मेटावल हमहन के पहिला काम होखे के चाहीं. हालांकि गरीबी दर में गिरावट का बावजूद हमहन के ई लड़ाई खतम करे से बहुते दूर बानी जा. भारत का लगे एह चुनौती से निपटे लायक बुद्धि, बेंवत आ संसाधन मौजूद बा.

11. हमहन के एहिजा ले ले आवे वाला सुधारन के शासन के हर स्तर पर चालू राखे के बा. आवेवाला बीसेक साल में हमनी के आबादी के लाभदायक संरचना बहुते काम आवे वाला बा. एकरा ला चाहीं औद्योगिक सुधार आ रोजगार संभावना के तेज गति से बढ़ावल. इहो जरूरी बा कि शहरीकरण व्यवस्थित तरीका से होखे. हाल का दिन में एह दिसाईं नया उत्पादन नीति, शहरी संसाधन के नवीकरण, आ कौशल बढ़ावे खातिर महत्वाकांक्षी प्रशिक्षण कार्यक्रम समेत सरकार के अनेके कदम पर आवे वाला समय में नजदीक से नजर राखलो के जरूरत बा.

12. हमनी का अपना नागरिकन के कानूनी गारंटी का साथे बहुते कुछ, काम के अधिकार, शिक्षा के अधिकार, भोजन के अधिकार, दिहले बानी जा. अब ई तय करे के बा कि एह प्रदान से लोग के साँच शक्तिकरणो होखत बा हमनी के एह कानूनी प्रावधानन के लागू करावे खातिर मजगर वितरण प्रणालियन के जरूरत बा. लोक सेवा के कुशल वितरण आ जिम्मेदारी स्थापित करे वाला नया मानक बनवला के जरूरत बा. सहायता के एही साल कुछ पहिले लागू भइल सीधे लाभार्थी ले लाभ चहुँपावे के योजना अधिका पारदर्शिता, अधिका कुशलता, आ अमूल्य संसाधनन के बरबादी में कमी ले आई.

साथी नागरिक सभे,

13. बढ़न्ती के दौड़ में हमनी का सावधान रहे के बा कि मनुष्य आ प्रकृति के बीच के संतुलन मत बिगड़ो. एह तरह के असंतुलन के परिणाम बहुत दुखदायी होखी. उत्तराखंड त्रासदी में मरे वाला अनेके लोग, आ ओहू ले अधिका संख्या में दुख झेले वाला लोग ला हम हार्दिक शोकसंवेदना देत बानी आ एह त्रासद घरी में राहत चहुँपावे का कठिन काम में लागल सुरक्षा के वीर जवानन, सैनिकन, सरकारी कर्मचारियन, आ गैरसरकारी संगठनन के हम अभिनंदन करत बानी. एह त्रासदी के कारकन में मानव सुभाव के लालसा ओतने शामिल बा जतना प्रकृति माँ के खीस.प्रकृति एहसे हमनी के जागे के संकेत दिहले बिया. चेते के समय आ गइल बा.

साथी नागरिक सभे,

14. हाल का दिनन में हमनी का अपना सुरक्षा, बाहरी आ भितरीओ, खातिर निकहा चुनौती देखनी सँ. छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के क्रूर चेहरा केतने निर्दोष लोग के जान ले लिहलसि. पड़ोसियन से बढ़िया संबंध बनावे के लगातार कोशिश का बावजूद सीमा पर तनाव पनपल बा, नियन्त्रण रेखा पर सीजफायर बेरबेर लँघाइल बा जवना में कतने जानन के त्रासद नुकसान भइल बा. शान्ति खातिर हमहन के प्रतिबद्धता खतम ना होखी बाकिर हमनी के धीरजो के एगो सीमा बा.भितरी सुरक्षा आ देश के भौगोलिक एकात्मकता बनवले राखे ला हर जरूरी कदम उठावल जाई. अपना सुरक्षा बल आ सैनिकन के साहस आ नायकता के हम सलाम करत बानी जे शाश्वत निगरानी बनवले राखेले आ ओह लोग के श्रद्धांजलि देत बानी जे मातृभूमि के सेवा में अन्तिम बलिदान आपन जीवन ले दे दिहलें.

15. अगिला स्वतंत्रता दिवस पर हमार अगिला संबोधन के सौभाग्य मिले से पहिले देश में एगो आमचुनाव होखे वाला बा. लोकत्तंत्र के एह महान पर्व हमनी के मौका देला कि हमनी का एगो टिकाउ सरकार चुनीं जे सुरक्षा आ आर्थिक विकास सुनिश्चित करे. जरूरी बा कि बढ़त सामाजिक सद्भाव, शान्ति आ समृद्धि का दिसाईं हर चुनाव एगो खास मील के पत्थर बने.

16. लोकतंत्र हमनि के एगो दोसर स्वर्ण युग फेर से बनावे के मौका दिहले बा. एह मौका के बाँव नइखे जाए देबे के. आगे के सफर विवेक, साहस आ लगन माँगत बा. अपना मूल्य आ जिम्मेदारी के फेर से सोगहग जियावे ला हमनी के लागे के बा. हमनी के ई जानल जरूरी बा कि अधिकार आ जिम्मेदारी साथे साथ चलेला. आत्मविश्लेषन आ आत्म संयम के महत्व फेर से जानल जरूरी बा हमहन के

17. आखिर में हमरा के महान ग्रंथ भागवतगीता से उद्धृत करत खतम करे दीं जहाँ गुरु आपन विचार दिहला के बाद कहत बा कि यथा ईच्छासि तथा कुरु. जइसन करे के चाहऽ तइसन करऽ. हम तोहरा पर आपन विचार लादल नइखीं चाहत. जवन हमरा ठीक लागल तोहरा सोझा राख दिहनी अब ई तोहरा पर बा कि जवन सही लागे तवन करऽ.

रउरे सभ का निर्णय पर लोकतंत्र के भविष्य टिकल बा.

जय हिन्द !


पिछला कई बेर के परपंरा निभावत अँजोरिया देश का नामे दिहल राष्ट्रपति के संबोधन के भोजपुरी अनुवाद परोसले बिया. अनुवाद का क्रम में भइल कवनो कमी भा गलती ला माफी चाहत बानी. बाकिर अगर भोजपुरी के संविधान में जगहा दिआवे के बा त अइसन कइल जरूरीओ बा.
जय हिन्द.
रउरा सभे के स्वतंत्रता दिवस के हार्दिक बधाई.

By Editor

2 thought on “६७वाँ स्वतंत्रता दिवस पर देश के नाम राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के संबोधन”
  1. जय हिंद.
    रउरा लगन आ मेहनत के सलाम.नीमन परंपरा के नींव रखले बानी.चलावत रहीं,काल्हु जरूर एकर मूल्यांकन होई.अभी जरूरत बा भोजपुरी के भंडार में हर तरह के सामग्री के बढ़ोत्तरी के.
    -विमल

कुछ त कहीं...

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