– सृजन गोरखपुरी

गोरखपुर के संस्था ‘भोजपुरी संगम’ के 151 वीं ‘बइठकी’ खरैया पोखरा, बशारतपुर में संस्था कार्यालय में वागीश्वरी मिश्र ‘वागीश’ के अध्यक्षता अउर अवधेश शर्मा ‘नन्द’ के संचालन में दू दौर में कइल गइल.

बइठकी के पहिला दौर बतकही के रहुवे. एकर शुरुआत करत डा. फूलचंद प्रसाद गुप्त कहनी कि भोजपुरिया धरती क्रान्ति अउर विद्रोह के धरती हवे. स्वतंत्रता आन्दोलन में जहाँ वीर आपन प्राण न्यौछावर कइलें ओहिजे भोजपुरी कवि अपना लोकगीतन का माध्यम से ओह लोगन में जोश अउर उत्साह भरलें. बतकही के क्रम के आगा बढ़ावत चन्देश्वर परवाना कहनी कि अपना देश में राष्ट्रीयता के भावना वैदिक साहित्य से लिहले आधुनिक काव्य तक विद्यमान रहल बा. आ भोजपुरी लोकगीतो में राष्ट्रीयता के प्रबल भावना देखल जाला.

बइठकी के दुसरका दौर में भोजपुरी लिखनिहार लोग आपन आपन भोजपुरी रचना सुनावत भोजपुरी से आपन अनुराग देखवलें. खास कर के : –

बृजेश राय बहुते सरस गीत सुनवनीं –

बोलेलू तब बिजुरी चमके हँसेलू त बदरा
झम-झम बरसे लगावऽ जहिया कजरा

सुधीर श्रीवास्तव ‘नीरज’ अपना कविता में आत्मिक प्रेम के गहनता देखवनी –

अंतरमन से नेह लगाईं,
उठीं तनिक गहिरे ले जाईं

कुमार अभिनीत भोजपुरी संगम के संस्थापक स्वर्गीय सत्य नारायण मिश्र ‘सत्तन’ बाबूजी के याद करत बहुते मार्मिक गीत परोसनी –

होत भिनहिएं चढ़त किरिनियाँ, हमें जगावें बाबूजी
चलीं बकइयाँ पकरि के अँगुरी, डेग चलावें बाबूजी

नर्वदेश्वर सिंह मौजूदा सूखा पर गहीर चिंता जतनवी –

बरसु-बरसु रे बदरवा मोरे खेतवा के अरियाँ,
सुखलेँ गड़ही पोखरिया, नाहीं तनिको पनियाँ

अरविन्द ‘अकेला’ पुरनका गाँवन के बखान करत सुनवनी –

अमवा क डरिया बइठि बोले कोइलरि
कउवा करेला कांव-कांव,
हे सखी! बहुतै सुघर लागे गाँव

सृजन गोरखपुरी अपना दोहा से भोजपुरी के पक्ष मजबूत करत सुनवनी –

नीमन लिखले से बनी, भोजपुरी सिरमउर
झंडा नारा मंच कऽ, माने हऽ कुछ अउर

चंदेश्वर ‘परवाना’ अपना रचना में सीता फुलवारी के सुकण्ठ चित्रण करत सुनवनी –

सिया सुकुमारि सखियन संग सुमन लोढ़े बदे जाली।
अरे फूलन के बीचे फूल लखि घबराय जा माली।।

सुभाष चंद्र यादव तंज करत कविता सुनवनी –

हमसे कुछु अउर लिखा जाला,
उनसे कुछु अउर पढ़ा जाला।

डॉ फूलचंद प्रसाद गुप्त के सशक्त दोहा सभे सराहल –

लोमरि रोटी ले गइलि, कइके मीठी बात,
काँव – काँव कउवा करत, करनी पर पछितात।

एह लोग के अलावा बागेश्वरी मिश्र ‘वागीश’, अवधेश नंद, बद्री प्रसाद विश्वकर्मा ‘साँवरिया’, राम समुझ साँवरा, अजय राय अनजान, जगदीश खेतान, अजय यादव, यशस्वी यशवंत इत्यादिऔ अपना काव्य पाठ से ‘बइठकी’ के सार्थक बनवनी। संयोजक कुमार अभिनीत अगिला ‘बइठकी’ के विषय सभका के बतवनी.

एह अवसर पर धर्मेन्द्र त्रिपाठी, वीरेन्द्र मिश्र ‘दीपक’, निखिल पाण्डेय, लोक गायक आलोक मिश्र, डॉ विनीत मिश्र सहित अनेके लोग सक्रिय सहभागिता कइनी.

आखिर में आभार ज्ञापन धर्मेन्द्र त्रिपाठी कइनी.

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By Editor

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