पिछला मंगल १० जुलाई का दिने जब पटना आ कुतुबपुर में भोजपुरी के शेक्सपियर कहाएवाला भिखारी ठाकुर के पुण्यतिथि मनावल गइल तवना दिने छपरा के भिखारी ठाकुर मोड़ पर मौजूद भिखारी ठाकुर आ उनुका मण्डली के मूर्ति बाट जोहत रह गइल एगो फूल माला के. ई मूर्ति स्थापित कइला का बाद ई पहिला मौका रहल जब एह जगहा पर कवनो कार्यक्रम आयोजित ना भइल. ना त कवनो राजनेता अइलें ना भोजपुरी के नाम पर आपन चेहरा आ धंधा चमकावे वाला लोग, देश विदेश में भोजपुरी के अलख जगावे वाला लोग.

गनीमत अतने रहल कि बिहार भोजपुरी अकादमी आ भिखारी ठाकुर के गाँव के कुछ नवजवान भिखारी ठाकुर के श्रद्धांजलि देबे के औपचारिकता निबाह दिहलें. कुतुबपुर में आयोजित कार्यक्रम में भिखारी ठाकुर के पोता राजेन्द्र ठाकुर, भिखारी ठाकुर के सहकर्मी रहल गोपालजीम विष्णुदेव शर्मा, चरण जी वगैरह का साथ कुछ जनकवि भिखारी ठाकुर लोक साहित्य व संस्कृति मंच के पदाधिकारी ललन राय, चुनमुन गु्पता, रवि कुलभूषण, गोपाल राय, किशुनदेव शर्मा, चंद्रशेखर बैठा, कृष्ण कुमार वैष्णवी आ कुछ स्थानीय लोग भिखारी ठाकुर के मुर्ति पर फूल माला चढ़ावल आ उनुका के श्रद्धांजलि दिहल. भिखारी ठाकुर के नाटक के प्रस्तुति भइल.

One thought on “छपरा के लोग भुला दिहल भिखारी ठाकुर के”
  1. कबो पटना से जात चाहे आवत समय के बात-
    हमरा इयाद परऽता कि सराब के दू चार गो बोतल छपरा के भिखारी चउक पर धइल रहे, ऊहो साफा सामनहीं लउकत रहे, ऊहो ओह सरक पर जवन पटना से सीधे जुरल बा।

कुछ त कहीं...

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