कुलदीप श्रीवास्तव के लिखल हिन्दी किताब ‘भोजपुरी सिनेमा के पचास साल : २५ चर्चित फिल्में’ के विमोचन पिछला दिने दिल्ली के हिंदी भवन का सभागार में भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का हाथे भइल. एह किताब में भोजपुरी सिनेमा के पचास साल के सफ़रनामा पर चर्चा कइल गइल बा. एह में १९३१-३२ में कुछ हिंदी फिल्मन में भोजपुरी गानन के शुरुआत, १९४८ में दिलीप कुमार के फिल्म ‘नदिया के पार’ में ८ गो गाना आ जे सभ भोजपुरी में रहे ओकरो जिकिर कइल गइल बा. एकरा अलावे १९६१ में जब पहिला भोजपुरी फिलिम ‘गंगा मइया तोहे पियरी चढ़इबो’, आ ओकरा बाद लागी नाही छूटे राम, धरती मईया, बिदेसिया, बलम परदेसिया, दगाबाज़ बलमा सहित कुल २५ चर्चित फिल्मन के विस्तार से वर्णन बा, जे भोजपुरी सिनेमा के ५० साल के इतिहास में आपन अमिट छाप छोड़ले बा.

कुलदीप श्रीवास्तव के लिखल एह किताब में भोजपुरी सिनेमा के असली रूप समेटल गइल बा आ एह धारणा के कि भोजपुरी फिल्मन में खाली फूहड़पन होला, झूठ ठहरावल गइल बा. लेखक एह किताब का जरिये कहले बाड़न कि भोजपुरी फिलिम अपना शुरुआते से समाज में बढ़िया सनेश देत आइल बा.

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