फिलिम त बहुते बनली सँ, कुछ सफल भइली सँ, त कुछ असफल. बाकिर बहुते कम फिलिम अइसन होखेली सँ जवन देश के मन मिजाज बदले के बेंवत राखेली सँ.

अइसने एगो फिलिम पिछला दिने आइल जवना के सफलता देखि के इहे लागत बा कि ई फिलिम देश के मन मिजाज बदल के राख दी. गंगा-जमुनी तहजीब के चरचा हमेशा हमेशा खातिर बन्द होखे के उमेद जाग गइल बा.

वइसे त देश में कई बेर आ कई जगहा हिन्दूवन के नरसंहार भइल. बाकिर केरल के मोपला नरसंहार, बंगाल के डायरेक्ट एक्शन, अउऱ कश्मीर में हिन्दूवन पर भइल अत्याचार इतिहास के ऊ करिखाह पन्ना हई सँ जवना पर आजु ले साँच ना त जाने दीहल गइल, ना बतावल गइल. कश्मीर में नरसंहार त भइल हिन्दूवन के बाकिर कांग्रेसी आ बँवारा कुचक्र में एकरा के कश्मीरी पंडितन के पलायन बता के पल्ला झाड़ लीहल गइल.

एहसे पहिले कि हम दि कश्मीर फाइल्स के चरचा करीं, हम मोपला नरसंहार आ डायरेक्ट एक्शन डे का बारे में संक्षेप में कुछ बतावल चाहब. देश के आ हिन्दूवन के दुर्भाग्य रहल कि मजहबी आधार पर भइल देश के बँटवारा का बावजूद देश में हिन्दूवन के ऊ अधिकार कबो ना मिल सकल जवना के ऊ हकदार रहलें. अय्याश नेहरु आ मोहनदास के साजिश का चलते देश के ऊ इतिहास पढ़ावल गइल, आ आजु ले पढ़ावल जात बा, जवना से हिन्दूवन पर भइल अत्याचारन के हकीकत छुपल रहि जाव.

आजादी का बाद के शुरुआती बरिसन में देश के शिक्षा मंत्री हर बेर मुसलमानन के बनावल गइल आ इतिहास लिखे के जिम्मा बँवारा गिरोह के इतिहासकारन पर छोड़ दीहल गइल. एह चलते देश में एगो अइसन मायाजाल बिछावल गइल जवना चलते हिन्दू कबो आपन हक ना पा सकसु. एगो कांग्रेसी प्रधानमंत्री त बेहाया का तरह कहि दिहलसि के देश के संसाधनन पर पहिला हक मुसलमानन के बा. देश के अनेके हिस्सन में अल्पसंख्यक हो चुकल हिन्दूवन के जरुरी संरक्षण ना दीहल गइल. कश्मीर, उत्तर पूर्वी राज्यन आ अंडमान निकोबार में हिन्दूवन के तादाद बहुते कम बा बाकिर ओहिजो अल्पसंख्यकन के मिले वाला संरक्षण ओहिजा के बहुसंख्यक जमातन के दीहल जा रहल बा. वइसे अब अल्पसंख्यक वाला मामिला का बारे में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो रहल बा आ केन्द्र सरकार हलफनामा दे के कहले बिया कि ई राज्य सरकारव पर बा कि ऊ अपना राज्य के अल्पसंख्यक के ओकर हक देव. केन्द्र देश भर का आधार पर अल्पसंख्यक तय कइले बावे.

दिल्ली के स्कूली शिक्षकन के वेतन देबे में आपन असमर्थता जतावे वाला केजरी हर साल करोड़ो रुपिया मस्जिद का इमामन के बीच बाँटत बा. हर मजहब के आपन मजहबी शिक्षा देबे के अधिकार बा बाकिर हिन्दूवन के ई अधिकार नइखे कि ऊ अपना मजहब के शिक्षा दे सकसु. हिन्दू मन्दिरन पर बेहाया तरीका से काबिज सरकार ओह मन्दिरन के मिलल चढ़ावा के इस्तेमाल गैर हिन्दू उद्देश्यन ला इस्तेमाल कर रहल बाड़ी सँ. दुख के बात बा कि आठ बरीस के शासन का बादो छप्पन इंची सीना के दावा करे वाला मोदी के करेजा नइखे कि ऊ हिन्दूवन का साथे होखत एह पक्षपात के बन्द करि सकसु. उलटे एह सरकार में मुसलमानन के मिले वाला अनुदान कांग्रेसियो सरकारन से आगे बढ़ गइल बा. आ एह सब का पीछे गाँधी नेहरु साजिश बा जवना के काट भाजपो नइखे निकाल सकत. एह सरकार में राहुल गाँधी के राष्ट्रियता के मामला, नेशनल हेराल्ड घोटाला के मामिला, रामसेतु के मामिला, मन्दिरन पर सरकारी कब्जा के मामिला, समान नागरिकता संहिता वगैरह कई मुद्दा दबा दीहल गइल बा. काहे कि मोदी के विश्वनेता बने के बा. खैर विषय के मूल से भटकाव छोड़त लवटल जाव.

बरीस 1921 के मोपला नरसंहार का दौरान मुसलमान केरल के मालाबार में जवना वीभत्स तरीका से हिन्दूवन के नरसंहार कइलें ओकरा के माफ ना कइल जा सके. वरियमकुन्नथ कुंजाहमद हाजी का नेतृत्व में नाहियो त अढ़ाई हजार हिन्दूवन के बेरहमी से हत्या कइल गइल. नाहियो त छब्बीस हजार हिन्दू आपन घर बार छोड़ के भाग परइलें. आ सैकड़न हिन्दू मंदिरन के विध्वंस करत अढ़ाई हजार से अधिका हिन्दूवन के जबरिया मुसलमान बना लीहल गइल.

एह वीभत्स घटना के रुप बदलि के मोपला विद्रोह के नाम दे दीहल गइल जवना में जमींदारन का खिलाफ किसानन के विद्रोह के कथा बनावल गइल. देश पर मुस्लिम आधिपत्य के सपना देखत खिलाफत आन्दोलन चलावल गइल. एह खिलाफत आन्दोलन के मोहनदास के भरपूर सहयोग मिलल. गाँधी का नाम से मशहूर मोहनदास के निकहा से मालूम रहुवे कि खिलाफत आन्दोलन हिन्दूवन का खिलाफ जाई. मोहनदास के शौकत अली आ मोहम्मद अली साफ बता दिहले रहलन स कि जिहाद के एह लड़ाई में हिन्दूवन से लड़े के योजना बा. एकरा बावजूद मोहनदास हिन्दूवन से अपील कइलसि कि ऊ लोग सगरी अत्याचार हँसि के सहसु आ खिलाफत आन्दोलन के समर्थन करसु. कहलसि कि ब्रिटिश हुकुमत सात करोड़ मुसलमानन के मजहबी भावना से खेलत बिया आ मुसलमानन के पूरा हक बा कि ऊ एकरा खिलाफ आन्दोलन करसु आ हिन्दू हर हालत में ओकर साथ देसु.

एही तरह ब्रिटिश काल में बंगाल के मुख्यमंत्री रहल सोहरावर्दी के शासन काल में 16 अगस्त 1946 का दिने हिन्दूवन का खिलाफ डायरेक्ट एक्शन डे के एलान भइल रहे, तीन दिन पहिले से पूरा राज्य के पुलिस वालन के छुट्टी पर भेज दीहल गइल रहे जेहसे कि मुसलमानन के हमला बेरोकटोक चलि सको. मुसलमानन के मांग रहुवे कि देश के मुस्लिम बहुल इलाकन के देश से अलगा करि दीहल जाव आ हिन्दू एह नाजायज मांग से सहमत ना रहलें. कांग्रेस देखावे खातिर एह मांग का खिलाफ रहुवे बाकिर मनही मन ओकरो इरादा रहुवे कि देश के बाँटिए दीहल ठीक रही.

16 अगस्त 1946 का दिने भइल एह डायरेक्ट एक्शन में देश में कई एक जगहा हिंसा भइल बाकिर सोहरावर्दी के सह मिलला का चलते बंगाल पर एकर असर सबले खतरनाक रहल. ओह दिने तब के कलकत्ता मे चार हजार से बेसी हिन्दूवन के काट डालल गइल. जिन्ना के खुला एलान रहुवे कि या त ओकरा हिन्दूस्तान के विभाजन चाहीं ना त ओकरा के बरबाद कर दीहल जाई.

16 अगस्त के बवाल लालबाजार थाना इलाका से शुरु भइल आ देखते देखत कई इलाकन में पसर गइल काहे कि एकरा ला पहिलहीं से हर मस्जिद में बतावल गइल रहुवे. आखिरकार देश के बँटवारा हो के रहल.

एह बँटवारा का बाद मिलल आजादी में ब्रिटिश सरकार हर राजा के आजादी दे दिहलसि कि उनुकर मन करे त आजाद रहसु भा अपना पसन्द के देश में शामिल हो जासु. कश्मीर के राजा हरि सिंह के कुछ समय लागल फैसला करे में आ एही बीच पाकिस्तान राज्य पर हमला बोल दिहलसि जवना में ओहिजा के स्थानीय मुसलमान महलावरन के भरपूर साथ दिहलें. भारत के प्रधानमंत्री का हिला-हवाली का चलते सेना भेजे में देरी भइल आ कश्मीर के एगो बड़हन हिस्सा पाकिस्तान का कब्जा में चलि गइल. ओकरा बावजूद कश्मीर के मुसलमान चाहत रहलें कि ओहिजा से हिन्दूवन के भगा दीहल जाव आ पाकिस्तान से मिल जाइल जाव. आ तबहिंए से हिन्दूवन का खिलाफ हिंसा आ अत्याचार के दौर शुरु हो गइल.

एकर सबले वीभत्स रुप देखे के मिलल 19 जनवरी 1990 का दिने. फारुख अब्दुल्ला एह नरसंहार के तय दिन का एक दिन पहिले योजनाबद्ध तरीका से मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे के इंगलैण्ड चलि गइलन. अचानक आइल एह इस्तीफा से राज्य में सरकार हीनता के हालात बनि गइल. कई दिन पहिले से मस्जिदन से लाउडस्पीकरन पर एलान होख लागल रहुवे कि सगरी हिन्दू अपना बहिन बेटी आ बीबी के छोड़ के भाग जासु.

दुख के बात ई रहल कि ओह दिने भइल हिन्दूवन के नरसंहार करे में पाकिस्तान से आइल आतंकी ना पास पड़ोस के मुसलमाने शामिल रहले जिनका साथे हिन्दूवन के रोज के भेंट मुलाकात के सिलसिला रहुवे. ओहनी के सब मालूम रहुवे कि केकरा के कइसे मारे के बा. बाकिर हिन्दुस्तान के नालायक सरकार एकरा के कश्मीरी हिन्दूवन के पलायन के नाम दे दिहलसि आ बँवारा आ लिब्रांडू मीडिया आजु ले एकरा के कश्मीरी पंडितन के पलायने कहि के बतावत रहेले.

बाकिर हिम्मत कहीं विवेक रंजन अग्निहोत्रि आ पल्लवी जोशी के जे एह सगरी नरसंहार के परत दर परत खोलि के देश का सोझा राख दिहलें. अभिव्यक्ति के आजादी के पैरोकार आ हिन्दू विरोधी मीडिया भरपूर कोशिश कइलसि के एह फिलिम के फ्लाप करवा दीहल जाव. अधिकतर मीडिया शुरु में एह फिलिम के चरचा करे से भागत रहलें. बालीवुड गिरोह जतना अड़ंगा डाल सकत रहुवे, डललसि. बाकिर देश के हिन्दूवन में एगो नया चेतना आइल बा जवना का चलते मुँहामुँही प्रचारे एह फिलिम के जबरदस्त सफलता दिआ दिहलसि. 15 करोड़ के लागत से बने वाली फिलिम तीन सौ करोड़ के कमाई कर चुकल बिया आ एह सफलता से अउरिओ निर्माता निर्देशक एह तरह के फिलिम बनावे का ओर बढ़ीहे.

सुने में आ रहल बा कि “1921 पुझा मुथल पुझा वारे” (1921 नदी से नदी ले) नाम से एगो मलयालम फिलिम बनावल जा रहल बा जवना में मोपला नरसंहार का बारे में देश के बतावल जाई. एह फिलिम के निर्देशक अली अकबर हउवें जे जनम से त मुसलमान रहलें बाकिर बाद में घर वापसी करत हिन्दू हो गइल बाड़न. उनकर नयका नाम रामसिंहन हवे. उमेद कइल जा सकेला कि जवना तरह कश्मीर फाइल्स फिलिम देश के मानस बदले के काम कइलसि ओही तरह इहो फिलिम ओकरा के अउर पोढ़ करी.

अब आईं दि कश्मीर फाइल्स फिलिमो का बारे में चरचा कर लीहल जाव. हम अबहीं ले ई फिलिम नइखीं देखले आ देखे के कवनो इरादो नइखे. काहे कि हालही में हमार एंजिओप्लास्टी भइल बा आ एह फिलिम के तनाव शायद हमार कमजोर हृदय बरदाश्त ना कर पाई. कइसे केहू निस्पृह भाव से देख सकी कि कइसे एगो मेहरारु के पहिले त सामूहिक बलात्कार कइल जात बा आ बाद में ओकरा के बिजली के आरा मशीन पर चीर दीहल जात बा. कश्मीर में हिन्दूवन पर भइल ई अत्याटार आम हिन्दुस्तानी के कबहूं जाने ना दीहल गइल आ एह साजिश में एह देश के मिडियो भरपूर सहजोग दिहले रहुवे.

बाकिर दि कश्मीर फाइल्स का बाद एह अत्याचार के झूठलावल आसान ना हो सकी. दिल्ली के गिरगिटहा मुख्यमंत्री विधानसभा में एह अत्याचारन के बात पर राक्षसी अट्टहास कइलसि आ कहलसि कि ई फिलिम झूठ देखावत बा. बाकिर बाद में जवन चौतरफा आलोचना होखे लागल ओकर त एकरी पर आपन गिरगिटहा पलटी मारत ऊ कई गो चैनलन पर आपन सफाई देत नजर आइल.

देश के मानस त पहिलहीं से बदलल शुरु हो गइल रहुवे आ ओहमें अब अउऱ तेजी से बदलाव होखी. हालही ले हर चुनाव से पहिले नेतवन के जालीदार टोपी में देखल आ इफ्तारी के भोज खात देखल आम बाति रहुवे. बाकिर अब उहे नेता लिलार पर चंदन लगवले मंदिरे मंदिरे घूमत लउकल बाड़ें. कवनो नेता के बेंवत नइखे कि ऊ हिन्दूत्व का खिलाफ जा सके.

आशा कइल जाव कि संतन के कत्लेआम करे वाली इंदिरागाँधी, कारसेवकन पर गोली चलवावे वावा मुल्लायम, गोधरा में ट्रेन के एगो बोगी जरा के ओकरा में मार दीहल बेकसूर कारसेवकनो पर कवनो फिलिम जल्दिए बनी. बने के त पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का बाद भईल हिन्दू विरोधी हिंसो पर फिलिम बने त स्वागत कइल जाई.

एह फिलिम के आलोचना करे वाला अब कहत बाड़ें कि कुछ मुसलमानन के अपराध खातिर पूरा कौम के दोषी ठहरावल बेजा होखी. बाकिर सैकड़न बरीस से साथ रहे वाला लोग जब आपन आचरण देखावत रहुवे तब बाकी के मुसलमान केने लुका गइल रहलें, एकरो जवाब मिले के चाहीं. गंगो हमरे, जमुनो हमरे त गंगा जमुनी तहतीब कइसन.

हिन्दू जाग गइल बा आ अब ओकरा के जगवले रखला के जरुरत बा. हर आदमी अपना जाँगर भर एह काम में सहजोग देव. पुष्पेन्द्र जी के भाषण के एगो अंश उद्धृत बा – जे लिख सकत होखे से लिखे, जे बोल सकत होखे ऊ बोले. अगर बोल नइखी सकत त जे लिखे बोले के काम कर रहल बा ओकरा साथे खड़ा हो जाई. ई मत सोचीं कि आग पड़ोसी का घर में लागल बा. देर सबेर ई आगि हमना सभके अपना गिरफ्त में लेबे के कोशिश करी. ओकरा से पहिले एह हिन्दू विरोध के जड़मूल से खतम कइल जरुरी बा.

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By Editor

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