‘भोजपुरी संगम’ के 144 वीं ‘बइठकी’ भइल त रहे कुछ दिन पहिले आ समय पर खबर मिलियो गइल रहुवे. बाकिर हमार एंजियोप्लास्टी के ऑपरेशन का चलते देरी से प्रकाशित कर रहल बानी. पता ना अब अँजोरिया के प्रकाशन कहिया ले जारी रह सकी. काहे कि अस्वस्थता का चलते हम आपन अध्यवसाय जारी नइखी राख सकत आ आर्थिक मजबूरी में एकर प्रकाशन बन्द होखे के अनेसा बन गइल बा.खैर.

त भोजपुरी संगम के 144 वीं बइठकी मे साहित्यकार लोग काव्य के विविध विधा का जरिए भोजपुरी के अलख जगावल. अध्यक्षता डा. आद्या प्रसाद द्विवेदी कइनी आ संचालन नन्द कुमार त्रिपाठी. ने किया.

यशस्वी यशवंत अपना कविता में सवाल उठवलन कि –

आज़ादी के माने का हऽ?
लड्डू ढोल नगाड़ा ना हऽ

त सरिता सिंह ममतामय माहौल बनवली –

अम्मा तोहरे अँचरवा के मोल नइखे

मधुसूदन पाण्डेय अपना कविता से बसंत के रंग चढ़वलन –

बसंत बगिया बउराइल हो
बाग अमवा क मोजराइल हो

रामनरेश शर्मा शिक्षक के कविता देशभक्ति वाला रहल –

सूरबीरन क ई माटी हऽ
पुरखन कअ ई थाती हऽ

डा. अजय राय अनजान प्रेम रस बरसावत सुनवलन कि –

तुँहसे जुड़ल हम बाटीं, तुँहके जोहत हम बाटीं
नाँव तुहरे ई ले लेके जियत हम बाटीं

गोपाल दूबे अपने सार्थक निर्गुन से बइठकी के ऊँचाई प ले गइलन –

कहवाँ नइहर में एतना अझुराइ गइलू?
काहे पियवा के अपने भुलाइ गइलू ?

नन्द कुमार त्रिपाठी मौजूदा चुनावी माहौल पर तंज करत सुनवलन –

नेता जी घूमें गाँव-गाँव
लागत बा अब आइल चुनाव

नर्वदेश्वर सिंह माडर्न बीवी के चरित्र चित्रण करत कहलन –

करत नौकरी बीबी अइलीं, भइलीं बेलगाम
हम बपुरा दिल थाम के देखीं, मनमानी सब काम

कुमार अभिनीत अपना कविता से मतदान करे बदे जागरूक कइलन –

देखऽ सबके मन में जगावऽ
बाबू-बहिनी के समझावऽ
कहि द निकरें घर से, चलऽ चलीं वोट डारे जी

चन्द्रगुप्त वर्मा अकिंचन देशभक्ति के मशाल जरवलन –

जुगन-जुगन से चलल आ रहल, ई हमार परिपाटी हऽ
खून त देहलीं, कबहु न देबँ, अपने देस क माटी हऽ

सृजन गोरखपुरी भोजपुरी ग़ज़ल पढ़लन –

पीरगाथा लिखाई न होले
जबकि गोड़े बेवाई न होले

हरिवंश शुक्ल हरीश आपन अन्दाज़ बयां करत सुनवलन –

अपने गउवाँ क हलिया सुनाईं कइसे
कइसे मिलल बा अजादी, बताईं कइसे

शशिविंदु नारायण मिश्र अपना ‘चिरई’ शीर्षक कविता से भोजपुरी में गद्य कविता का समावेश कइलन. इं. राजेश्वर सिंह अपना हालही में प्रकाशित ‘भोजपुरी रामायण’ पर प्रकाश डालत ओकरा के प्रतिभागियन में बँटलन.

अध्यक्षता करत डा. आद्या प्रसाद द्विवेदी बइठकी के निरंतरता आ प्रतिबद्धता के सरहनी. बइठकी में राम सुधार सिंह सैंथवार, बृज नारायण सिंह, यशवंत, डा. विनीत मिश्र सहित अनेके लोग के सहभागिता रहल. आभार ज्ञापन कुमार अभिनीत कइलन.

By Editor

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