गोरखपुर के ‘भोजपुरी संगम’ के 145 वीं ‘बइठकी’ इंजीनियर राजेश्वर सिंह के अध्यक्षता आ अवधेश शर्मा ‘नन्द’ के संचालन में पिछला दिने 66, खरैया पोखरा, बशारतपुर, गोरखपुर में बनल संस्था कार्यालय में संपन्न भइल. बइठकी के पहिलका सत्र में ‘भोजपुरी लोकगीतन में पर्यावरण के चिंता’ विषय पर बतकही के आयोजन कइल गइल जवना में कई विद्वान आपन आपन विचार रखलें. डॉ. आद्या प्रसाद द्विवेदी के कहना रहे कि पेड़न के पूजा-अर्चना खाली लोके जीवन ला खास ना होखे, एकर वैज्ञानिक आ पर्यावरणीय आधारो बा. जहां विज्ञान एह पेड़ पौधन के औषधियुक्त वनस्पति मानेला ओहिजे लोकमानस एहनी में देवी-देवतन के निवास मानके पूजेला. एह आस्था के बनवले राखल बहुते जरुरी आ मंगलकारी होखी.

बइठकी के दुसरका सत्र में विविध रंगन में शब्दन के बरखा भइल –

राम नरेश शर्मा ‘शिक्षक’ बसंती बयार बहावत सुनवलन –

चलऽ चलीं बगिया की ओर
आइल बसंत बहार चहुँओर

कुमार अभिनीत फागुनी माहौल में चार चाँद लगावत सुनवलें –

होली कऽ हुड़दंग जोगीरा स रऽ रऽ
चढ़ि गै माथे भंग जोगीरा स रऽ रऽ

रामसमुझ ‘सांवरा’ बाकायदा सुकंठ फाग परोसलन –

खेलें कदंब तरे होरी श्याम जी
खेलें कदंब तरे होरी

अरविंद ‘अकेला’ के कविता में देश के सीवान पर मौजूद सेना के जवानन के होली के बात कइलन –

घरवाँ आइब ना ऐ जान!
सीमवा पर मचल बाटें होली

वागीश्वरी मिश्र ‘वागीश’ के पुरहर चिंता रहुवे कि –

बचपन से अबले देहीं पर / कब्बो गरमी नाहीं आइल
केतना आइल-गइल बसंत

प्रेम नाथ मिश्र आपन सुंदर छंद पढ़लन –

संख बजल घरी घंट बजल
मंदिर में सुमंत्र सुनाइल बाटे

सुधीर श्रीवास्तव माहौल के मंगलमय बनावत सुनवलें –

छोड़ि दंभ दुइ चार, मनोहर बाग लगाईं

ओम प्रकाश पाण्डेय ‘आचार्य’ आपना कविता से रामचरितमानस के महातम समुझवलन –

संकठ आई पहाड़ नियर बनि आन्हीं ई तिनका नियर उड़वाई
साँच कहीं बतिया सुनि लऽ, घरवां ओकरे सुख-शांति छिंटाई

निर्मल कुमार गुप्त के रचना में गूढ़ता के परिचय रहल –

एक बित्ता क चुचकल पेट
तूँ केतना लंबा चरेला खेत

वीरेन्द्र मिश्र ‘दीपक’ बइठकी के गम्भीरता देत कहलन –

थकहर जिनिगिया के सपना सेराइल
थउसि गइल हाथी हउदा हेराइल

चन्देश्वर ‘परवाना’ के मधुरिम गीत से बइठकी के अंत भइल –

फर-फर फरे आँखि राती, बुझाता घरे सइयाँ अइहें
चउकठ हँसे सँझवाती, बुझाता घरे सइयाँ अइहें

बइठकी में चन्द्रगुप्त वर्मा ‘अकिंचन’, नर्वदेश्वर सिंह, बृजेश राय, डा. अजय राय ‘अनजान’, प्रदीप मिश्र आ आदित्यो कुमार के भी रचनात्मक सहभागिता रहल.

एह अवसर पर धर्मेन्द्र त्रिपाठी, सृजन गोरखपुरी, रवीन्द्र मोहन त्रिपाठी आ डा. विनीत मिश्र के उपस्थिति विशेष रहुवे.

बइठकी के आखिर में आभार ज्ञापन कुमार अभिनीत कइलन.

स्रोत – सृजन गोरखपुरी, (मीडिया प्रभारी), भोजपुरी संगम


By Editor

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