‘भोजपुरी संगम’ के 134 वीं ‘बइठकी’ संस्थापक सदस्य स्वर्गीय सत्यनारायण मिश्र ‘सत्तन’ के खरैया पोखरा, बसारतपुर, गोरखपुर स्थित आवास पर प्रो. राम दरस राय के अध्यक्षता आ पुरनिया कवि चंदेश्वर परवाना के संचालन में दू सत्र में करावल गइल.

पहिलका सेसर कलमकार के रूप में भोजपुरी के भगीरथ कवि विवेकी राय के व्यक्तित्व आ कृतित्व पर चरचा भइल. प्रो. आर.डी.राय अपना अध्यक्षीय संबोधन में कहनी कि – ‘विवेकी राय के साहित्य में भारत के समहर रूप से देखल जा सकेला. उनुकर वेशभूषा, सुभाव सब कुछ भारतीयता के परिचय देत रहे. नाटक का साथ ही साहित्य के हर विधा में विवेकी राय पूरहर काम कइले बानी. कविता से शुरु होत विवेकी राय जी उपन्यास, निबंध, संस्मरण, रिपोर्ताज, डायरी वगैरह सगरी विधा में खूब रचले बानी जवन आजु के पीढ़ी ला प्रेरणादायी बा. भोजपुरी आ हिन्दी दुनु में विवेकी राय के बराबर के दखल रहल बा.

चरचा आगे बढ़ावत नंद कुमार त्रिपाठी विवेकी राय के जीवन-वृत्त आ उनुकर रचल भोजपुरी अउर हिंदी कृतियन का बारे में विस्तार से बतवनी. साथ ही कई विश्वविद्यालयन में विवेकी राय पर भइल शोधो के चरचा कइनी. कहनी कि विवेकी राय के मिलल राष्ट्रीय स्तर के सम्मान अउर पुरस्कारन के लमहर फेहरिस्त बा जवना में ‘साहित्य भूषण’, ‘यश भारती’, ‘राहुल सांकृत्यायन पुरस्कार’ आदि प्रमुख बाड़ी सँ.

बइठकी के दुसरका सत्र कवितई के रहल जवना में डॉ.फूलचंद प्रसाद गुप्त, ओमप्रकाश पांडेय ‘आचार्य’, चंदेश्वर ‘परवाना’, शशि बिंदु नारायण मिश्र,चंद्रगुप्त वर्मा ‘अकिंचन’, संतोष ‘संगम’, डॉ. अजय अनजान, सुधीर कुमार मिश्र, गोपाल दुबे, नंद कुमार त्रिपाठी, कुमार अभिनीत, ज्ञानेश कुमार ‘नापित’,आशु, कार्तिक वगैरह कवि अपना-अपना काव्य-पाठ से बइठकी के समृद्ध कइनी.

एह अवसर पर रवींद्र मोहन त्रिपाठी, डॉ.विनीत मिश्र, आलोक कुमार राव वगैरह अउरिओ लोग उपस्थित रहे. आखिर में संयोजक कुमार अभिनीत सभका ला आभार जतवलन.

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