lokras1मंगल के साँझ बलिया के लोग बापू भवन, टाउन हॉल, में भोजपुरी लोकरस में देर रात ले डूबल उतराइल. भोजपुरी गीतन से फूहड़पन हटावे का अपना अभियान के रचनात्मक तरीका से परंपरागत भोजपुरी गीतन के फेर से जीयतार बनावे का मकसद से बलिया के एगो सामाजिक सांस्कृतिक संस्था ‘पहल’ एह कार्यक्रम के आयोजन कइलसि.

कार्यक्रम के शुरुआत मुख्य अतिथि टाउन डिग्री कालेज के संगीत विभाग के अध्यक्ष डा.आलोक सक्सेना दीया जरा के कइलन. ओकरा बाद गायिका अनुभा राय ‘नीमिया के डाढ़ि मइया लावेली झुलुववा कि झुली झुली ना’ से लोक रस कार्यक्रम के शुरुआत कइली. उनका बाद अइलन उभरत गायक कुणाल मिश्र जे ‘देवी लचकि परी पंइया ए महतारी’ सुनाके सभका के भक्ति का रस मे डूबा दिहलें. आ इनका बाद आइल राजीव राय त कार्यक्रम में अपना गायकी के समां बान्ह दिहले. उनका बाद अइले युवा गायक विशाल गगन जे देर तक ले सुने वालन के अपना गीतन पर झूमावत रहले.

विशाल गगन का बादो अनेके कलाकार आपना गायकी सुनवले. एहमें रीना पाडेय, मयंक मुनमुन, कृष्ण कुमार, प्रीति राय, मिंटू सेवक, अनिल मिश्र, सोनू लाल यादव के गायन बहुते बढ़िया रहल. ‘पहल’ संस्था के सचिव आ जानल मानल गायक शैलेंद्र मिश्र परंपरागत लोकगीत “गंगा माई के ऊंची अररिया” सुनाके एह भोजपुरी परंपरा से लोगन के जोड़ले.

कार्यक्रम में आइल सगरी कलाकारन के गणमान्य लोग का हाथे स्मृति चिह्न दे के सम्मानितो कइल गइल. आखिर में आयोजन समिति के अध्यक्ष लवली शुक्ला सभकर आभार जतवले.

एह कार्यक्रम के सफल बनावे में राकेश विक्रम सिंह, रजनीकांत सिंह, डा॰ आरवीएन पांडेय, सौरभ शुक्ला, अभय सिंह कुशवाहा वगैरह के भरपूर सहयोग रहल.
(नि॰ सं॰)

By Editor

2 thought on “बलिया में लोकरस के सरिता बहल”
  1. बहुत नीक लागल । भोजपुरी सभ्यता आ संस्कृति के नीमन बनाम असली चेहरा तबे सामने आई जब एह तरह के आयोजनन में बुद्धिजीवी वर्ग रुचि लेबे लागी । बधाई ।
    रामरक्षा मिश्र विमल

  2. अईसन कार्यक्रम के आयोजन करेवाला के साधुबाद .भोपुरिया फूहड़पन से मन आजिज हो गईल बा.

कुछ त कहीं...

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