– लाल बिहारी लाल

LalBihariLal
कवन भूल भइल हमसे भारी
विधाता दिहल तू अइसन नारी

बात-बात पर गाल बजावे
कह कछुओं तS आंख देखावे
कलजुग के अइसन नारी
विधाता दिहल तू……..

गहना किन तS खुस हो जाली
सारी किन तS उS बरी सरमाली
बुझसS ना कवनो लाचारी
विधाता दिहल तू……..

दूध के बादला पानी पिआवस
पाले में लइका नाक सिकुरावस
धन –धन अइसन महतारी
विधाता दिहल तू……..

लाल बिहारी लाख समझवले
तबहू बदल नाही पवली हो रामा
उनका निक लागे ना ससुरारी
विधाता दिहल तू……..


* सचिव-लाल कला मंच, नई दिल्ली
फोन-9868163073 या 7042663073
मेल आई डी-
lalkalamunch@rediffmail.com

By Editor

One thought on “आधुनिक नारी”

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