Ram Raksha Mishra Vimal

– रामरक्षा मिश्र विमल

खरके मड़इया के सींक
रहि रहि टङाला परान.

सूरज सुतल बाड़े रतिया उतान
परसो होई एक पल के बिहान
मन के जवन लागे नीक
ओही प मनई के शान.

खतरा बा लँघला प आपन सिवान
कठवति के गंगा में कउवा नहान
बनि जाला जीवन के लीक
थथमेला मन के उठान.

तिकड़म के बाती से ललसा धुआँय
स्वारथ के लवना से नेहिया फँफाय
अब कइसन गलती का ठीक
जेकर हो जतना उड़ान.


अँजोरिया पर विमल जी के पुरान रचना


पता ना कवना गड़बड़ी से एह पन्ना पर टिप्पणी बन्द हो गइल बा. हम कई बेर चालू करे के प्रयास कइनी बाकिर होत नइखे.
एहसे एगो सुधि पाठक के इमेल से मिलल टिप्पणी गीत का साथही लगा देत बानी,
संपादक


विमल जी के ए समकालीन गीत से हम परिचित बानी | जब नवंबर २००८ में मुंबई में एगो क्षेत्रीय उग्र राजनीतिक नेता के बुरी तरह शिकार भइल उत्तर भारतीय खासकर हिंदीभाषी लोग, राजनीतिक पार्टी देशहित के ताख प राखिके अपना पाटी के अस्तित्व बचावे में जुट गइली स आ बिहार-यूपी के लोगन प जुल्म होखे लागल त उहाँ का ई गीत लिखले रहीं | बाद में ई कवनो भोजपुरी पत्रिका में भी छपल रहे |
“खरके मड़इया के सींक” भोजपुरी के चुनिंदा नवगीतन में एक बा.एकरा में प्रयुक्त आधुनिक बिंब आ प्रतीकन का साथे लोकोक्तियन के अतना नीमन प्रयोग भोजपुरी में कम लउकता |
-पथिक भोजपुरी

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