– रामसागर सिंह

दहेज लीहल बाउर बात ह…
आपन बियाह भइला के बाद,
दहेज लीहल बाउर बात ह…
बेटा के बियाह कइला के बाद,
ओइसहुँ कुछु माँगल ठीक ना ह…
बेटिहा से घर भरवइला के बाद!

एने के बात ओने ना करे के…
गाँव भर के लड़वइला के बाद,
भाई भाई में टेंट मत बेसाहीं
आँगना घर बँटवइला के बाद!
ओइसहुँ आगी में घीव ना डाले के
सब कुछ जर गइला के बाद!

साचहुँ लालच बड़की बलाय ह..
लूट-खसोट आ चोरइला के बाद,
साधु बन गइल नीमन उपाय ह…
सगरी कुकरम कइला के बाद,
अइसहुँ कुछउ नीमन कहाँ लागेला
ठुँस-ठकच के खइला के बाद!

तीरथ,धाम,आउर अर्पण,तर्पण
पाप से मन उबियइला के बाद,
परमारथ साध तऽ जागिये जाला
स्वारथ के सध गइला के बाद,
“रामसागर ” बिलारो भगतिन बनस
सतहत्तर मुस चबइला के बाद!

  • रामसागर सिंह,
    कोदई, पचरुखी, सिवान,

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कुछ त कहीं......

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