– संतोष पटेल

हाथी त अब रहल ना,
बाकिर सीकड़ बाचल बा.
नदी त सूख गइल,
अब कीचड़ बाचल बा.

नीक रहे जे ऊ सभ,
दुनिया से चल गइल.
बेचत बा ईमान जे,
उहे लीचड़ बाचल बा.

जनता के देह में खून,
भले ना होखे त का,
तेहू पर ओकरा चूसेला,
चीचड़ बाचल बा।

नाम बदले में ओकर जोड़,
ना लगा सके केहू
बदलल नाम बाकिर,
रेल फटीचर बाचल बा,

हंसी उड़ावेलें उहो,
खूब जे कुछ करस ना,
मरूथल में बस अब त,
बबूरे कीकड़ बाचल बा.

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कुछ त कहीं......

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