भउजी हो!

का बबुआ?

अबकी त लागत बा कि होली के हत्या हो गइल.

काहे बबुआ?

देखतानी कि फगुआ के दू चार गो दिन रहि गइल बा बाकिर कतहूँ केहू का देंहि पर रंग नइखे लउकत.

हो सकेला कि लोग महाराष्ट्र का सूखा का चलते एह साल होली पर रंग ना खेलत होखे.

ना. कूछ अउर बात होखी.

हो सकेला कि नारी विरोधी अत्याचार वाला कानून से डेरात होखे लोग.

हँ भउजी, साँच कहऽ त हमरो डर लागऽता भउजाईयन भा साली सरहजन से फगुआ खेले में. का पता कब के कवनो मुकदमा लेके ठाड़ हो जाव.

अतना डेरइला के जरूरत नइखे बबुआ. सरहजन का बारे में त नइखी जानत बाकिर भउजाई आ साली मुकदमा ना करीहें सँ. बाकिर करिए दी केहू त डेरइला के कवन बात?

एह से कि भउजी हम हईं हिंदू आ हमरा मुकदमा खातिर त सरकार अलगा कोर्ट बनाई ना जइसे कि ऊ अल्पसंख्यकन ला बनावे जात बिया.

एह पर एगो सवाल हमरो मन में उठत बा बबुआ.

का भउजी?

आधा अल्पसंख्यकन के मुकदमा कवना कोर्ट में सुनल जाई?

आधा अल्पसंख्यक! ई का होला भउजी?

अरे जेकर बाप महतारी दुनु अल्पसंख्यक से त पूरा अल्पसंख्यक भइल बाकिर जेकर बाप भा महतारी में से एगो हिन्दू रहल त ऊ आधा अल्पसंख्यक भइल कि ना?

से त बा भउजी. बाकिर आधा चउथाई हिंदू होखसु त होखसु अल्पसंख्यक हमेशा पूरा होलें. देखत नइखू कि एगो आतंकवादी के गिरफ्तार कइला का चलते दिल्ली पुलिस के कठघरा में खड़ा कइल जात बा. काश्मीर में पुलिस का हाथ से हथियार हटा के लाठी थमा दिआता. पंचायत सदस्यन के सुरक्षा करे ला पइसा नइखे काश्मीर सरकार का लगे बाकिर अलगाववादियन के सुरक्षा पर करोड़ो के खरचा कम लागत बा.

चलीं आजु रउरा जीतनी. लीं गुझिया खाईं. रउरा ला पहिलहीं से बना के रखले रहनी ह.

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