भउजी हो!
का बबुआ?

ई कांग्रेसिया प्रियंका के नाम सुन के अतना भड़कत काहे बाड़े सँ?
भड़के वाली बात बा से भड़कत बाड़े स.

बुझनी ना.
बूझब कइसे? रउरे सभ के आग लगावल ह. कांग्रेसिया सब बूझत बाड़े.

अच्छा मान ल कि प्रियंका राजनिति के मैदान में उतरिए जात बाड़ी त का नुकसान बा. हमरा त लागत बा कि कांग्रेस के फयदे होखी.
ए बबुआ, अतना अनबूझ मत बनीं. प्रियंका के अइला के मतलब पहिला त ई होखी कि राहुल काम लायक नइखन. दोसरे प्रियंका के नाम आवते रउरा सभे वाड्रा के नाम उछाले लागब. तब मामिला सांप्रदायिकता से हट के भ्रष्टाचार पर आ जाई. आ एह फेर में राहुल त बेकार होईए जइहें प्रियंको के गुमान टूट जाई कांग्रेसियन के. आ कांग्रेस के आखिरी तुरूप के पत्तो निकल जाई. तब पन्द्रह बीस साल ले इंतजार करे पड़ जाई.

काहे भउजी? चुनवउवा त हर पाँच साल पर होला.
बाकिर प्रियंका के बचबन के सयान होखे में टाइम लागी कि ना? आ पता ना कब राहुल बिआह करीहें, कब बच्चा होखी.

से त ठीके कहत बाड़ू भउजी. त अबकी राहुले के हारे दीहल जाव.
हई मुँह आ मसूर के दाल? पोखरा में मछरी नव नव कुटिया बखरा ! चुनाव होखे त दीं पते चल जाई कि के हारी के जीती. के हारियो के जीत जाई आ के जीतियो के हार जाई.

ठीक बा भउजी. उहो देख लीहल जाव. चलत बानी.
रुकीं चाय पीयले जाईं,

ना रहे द। कानपुर वाली ट्रेन छूट जाई.

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By Editor

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