भउजी हो!

का बबुआ?

आदमी कवना बात से अधिका खुश होला?

दोसरा के दुख से.

ठीक कहलू. आ पोसुआ मीडिया के छाती कब फुलेला?

जब केहू मोदी के शिकायत करो भा कुछ मोदी का उलटा होखो.

अरे वाह भउजी! तू त आजु कमाल करत बाड़ू. आ कवन बात ह जवन सेकूलर जमात करे त नीमन आ नेशनल जमात करे त गलत?

कवनो समाज के बाँटल.

का भउजी, ढेरे टीवी देखे लागल बाड़ू का?

का कइल जाव बबुआ. महँगाई बढ़ले जात बा आ रउरा भईया के कमाई सिकुड़ल जात बा. एहसे कामे भर काम रहत बा. ना कीने के पड़त बा ना बनावे के. फरमाइशो कम हो गइल बा रउरा भईया के. से खाली समय काटे खातिर का कइल जाव? टीवीए नू रह गइल बा देखे के. सर सिनेमा देखे में खरचा ढेर बढ़ गइल बा.

बाकिर तू सास बहू वाला सीरियल छोड़ न्यूज चैनलन पर काहे जमे लागल बाड़ू?

अरे बबुआ ओतना चाल कुचाल त सासो बहु का सीरियलन में देखे के ना मिले.

अच्छा त चलत बानी. आजु हमहू कवनो फरमाइश ना करब.

By Editor

2 thoughts on “भउजी हो! आदमी कवना बात से अधिका खुश होला?”

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