भउजी हो !

का बबुआ ? सोझा-सोझी भेंट करे के समय ना मिले त वर्चुअले मीटिंग कर लीहल करीं. अब हमहूं सीखे लागल बानी जूम, मीट, ह्वाट्सअप कॉल वगैरह.

पहिले त इहे सोचनी कि वर्चुअले मीटिंग कर लीं बाकिर सोझा-सोझी बतियावे में जवन आनन्द मिलेला, ज‌‌ानकारी मिलेला तवन वर्चुअल में ना हो पावे. जानल चाहत बानी कि इंडी गठबन्हन में समझौता काहे नइखे हो पावत ?

ए बबुआ ! लट्ठ ले के खोजे लगीहें स रउरा कि ओहनी के गठबन्हन के इंडी गठबन्हन काहें कहत बानीं. मानत बानी कि रउरा सहिए कहत बानी. काहें कि इंडिया के आखिरी ए एलायंस के पहिला अक्षर ला हवे आ सही त इहे रही कि ओकरा के या त इंडिया कहल जाव ना त इंडी एलायंस. बाकिर बूड़बक बुझावे से मरद ! रउरा अइसन मरद हईं ई हम ना मानीं आ हम त मरद हईए ना हईं.

मान लिहनी भउजी तोहार बाति. बाकिर हमरा सवाल के काहें पचा गइलू ? बतावऽ ना कि सीट समझौता काहें नइखे हो पावत ?

भाजपा के चार गो भूत अपना कान्ह पर इंडी के टिकठी निकाले में लागल बाड़ें.

भाजपा के भूत ! ए भउजी भाजपा त वर्तमान बिया भूत कइसे हो गइल ?

बबुआ जी, हम भाजपा के भूत ना कहनी ह, हम भाजपा के भूतन के बात कइनी ह. जानते बानीं कि टिकठी ढोवे ला कम से कम चार गो लोग कान्ह देबे वाला जरूरे चाहेला. आ भाजपा अपना चार गो भूत लगा दिहले बिया एह इंडी का खिलाफ. आ ई चारो भूत, जिन्न के बात अबहीं नईखे होखत, भूतकाल में भाजपा के सहजोगी रहल बाड़े सँ. उद्धव, ममता, नीतीश, अउर मायावती. आ ई चारो कवनो ना कवनो बहाने इंडी के पटाखा के पलीता जरावे में लागल बाड़ें.

बाकिर भउजी, ई कइसे कहल जाव कि भाजपा लगवले बिया एह भूतन के ?

बबुआ जी, अमित शाह के ऊ भासनवा नइखीं सुनले का कि, “हम जो कहते हैं उसे जरुर करते हैं और जो नहीं कहते उसे भी किए बिना नहीं मानते !” राजनीति में कई बेर जवन लउकेला तवन होला ना, आ जवन होखेला तवन कई बेर लउके ना. एह भूतन के चरचा करे से पहिले हम पता ना कतना कप चाय पियनी तबो इंडी के समस्या के जड़ ना भेंटात रहुवे. पिछला दिने अचके में विक्रम आ वैताल वाली कहानी मन पड़ गइल आ हमरा सवाल के जवाब मिल गइल.

हँ भउजी, ठीके कहत बाड़ू. चाल अतना काम वाला बा कि एकरा के चालबाजो ना समुझ पइहें. मजे के बात इहो रही कि ई बतिया ई चारो भूतवो ना मनीहें सँ.

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कुछ त कहीं......

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