लोकतंत्र के हत्या

Written by OmPrakash Singh

November 26, 2010

भोला बाबू खीसे फनफनाइल रहलें. पुछनी कि का बात हऽ त बिफर पड़लें. कहे लगले, नीतीश त हदे कर दिहलें. अइसनो कइल जाला ? लोकतंत्र के कमजोर कर के राख दिहलें, राहुल गाँधी के बेइज्जत कर दिहलें, आ लालू से पता ना कवना जनम के दुश्मनी निकाल लिहलें.

कुछ देर त हमरो समुझ में ना आइल कि का भइल. सगरी प्रान्ते ना पूरा देश में नीतीश के जयकारा लाग रहल बा, बिहारियन के इज्जत बढ़ गइल आ भोला बाबू बाड़न कि बिखियाइल साँप बनल बाड़न. पुछनी कि भोला बाबू तनी फरिया के बताईं कि का कइलें नीतीश ?

भोला बाबू कहलें कि बिहार के विकास के अइसन ना ढोल पिटलें कि बाकी लोग के विकास रोक दिहलें. अरे के विकास करे में नइखे लागल ? सोनिया, मनमोहन, ए राजा, येदियुरप्पा, लालू, राबड़ी, पासवान सबही त विकासे करे में लागल बा. केहू अपना परिवार के त केहू अपना पार्टी के, केहू खुद आपन. बाकिर नीतीश के हो हल्ला से बाकी सबही के विकास रुकल कि ना ?

राहुल गाँधी जइसन नवही नेता, जे अब कुछेके साल में चालीस पार कर जाई कि पता ना पारो कर गइल बा, के तनिको धेयान ना कइलें. अरे कम से कम जहाँ जहाँ राहुल के भाषण भइल रहे तहाँ तहाँ त कांग्रेस के जीत जाये देतें. बाकिर ना ! ए मरदवा के त संतोषे नइखे. सगरी सीट लूट लेबे में लागल रहे आ करीब करीब लूटये लिहलसि जनता के अपना तरफ कर के. अब बताव कि लालू आपन, अपना परिवार के कइसे आगा बड़इहें ? तेजस्वी के ट्रेनिंग देबे के कोशिश बेकार कर दिहलें. आ राबड़ी देवी के दुनु सीट से हरवला के का जरुरत रहे ? एक सीट से बेचारी जीत गइल रहीत त कम से कम विपक्ष के नेता बन के कैबिनेट मंत्री वाली सगरी सुविधा त रहित लालू के परिवार का लगे. पासवानो बेचारा अपना भाई के विकास करावल चाहत रहलें. उनको के हरवा दिहलें.

भोला बाबू आगा कहत गइलें कि, लोकतंत्र के हत्या करे में नीतीश के नाम बहुते शर्म से लिहल जाई. पुरा विपक्षे हरा दिहलें. अतनो सीट ना लेबे दिहलें कि कम से कम विपक्ष के नेता त केहू बन जाइत. अब जवन जीतल बा लोग ओहि में से नू केहू के विपक्ष के नेता बनावे के पड़ी. जवन लालू बर जिनिगी अपना परिवार छोड़ दोसरा केहू के आगा ना आवे दिहलें अब ओह बेचारा के अपना छाती पर पत्थर राखि के केहू दोसरा के विपक्ष के नेता बनावे पड़ी कि ना ?

अब हमरा बुझात ना रहे कि भोला बाबू के कइसे समुझाईं त याद पड़ल कि भोला बाबू पुरनका कांग्रेसी हउवन. कहनी कि भोला बाबू रउरा त खुश होखे के चाहीं. लालू के सफाया करावे खातिर कांग्रेस के चाल सफल हो गइल. अगर कांग्रेस के मिलल वोट राजद लोजपा के मिलल वोट से जोड़ दीं त नतीजा कुछ दोसरे रही.

भोला बाबू जवाब दिहलें, खाली कांग्रेसे के काहे दोष देत बाड़ ? लालूओ के त पूरा कोशिश रहल कि कांग्रेस के बैण्ड बाज जाव. ना त जहाँ जहाँ कांग्रेस लड़ाई में रहुवे ओहिजा राजद लोजपा के वोट मिला द त कांग्रेस के कम से कम तिगुना सीट मिलल रहीत.

देखनी कि आजु भोला बाबू से निबटल आसान नइखे त हम धीरे से ई कहत सरक लिहनी कि एह लोग के अतनो पर संतोष नइखे. देखीं ना भाजपा तीन गो निर्दलीय जीतल विधायकन के अपना में मिलावे जा रहल बिया.

जात जात सुननी कि भोला बाबू कुछ अउरी बोकरत रहलें.

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