भउजी हो !

का बबुआ ?

हैप्पी वैलेंटाइन डे !

शेम टू यू बबुआ.

अरे भउजी तू सेम का बदला शेम काहे कहताड़ू ?

काहे ना कहीं ? याद बा पिछला बेर कब आइल रहीं. वसन्त पंचमीओ का दिने भउजी याद ना अइली बाकिर वैलेंटाइन दिने आ गइली.

जमाना बदलत बा भउजी. बाप के नाम साग पात बेटा के परोरा. सुनले नइखू ?

सुनले बानी. बाकिर रउरो पर एकर असर पड़ जाई से ना सोचले रहीं. लागऽता कनियवा का फेर में रउरा अंगरेज होखल जात बानी.

ना भउजी, कनियवा के एह सब से कवनो मतलबे ना रहेला. ऊ त अपने दुनिया में मगन रहेली आ हमरो के अझूरवले राखेली. आजु मौका मिलल ह त चलि अइनी ह.

ओकरो के ले के आइल रहतीं. बेचारी हमेशा घर में घेराइल रहेले. रउरा अपना से कतना फुरसत मिलेला हमहू जानीले. चलीं अब आइल बानी त बइठल जाव. ढेर दिन हो गइल बतिववले.

अब चुहानिये में ना नू बात होई ? चलऽ चलल जाव बइठका में.

ए बबुआ हमनी मेहरारुवन के किस्मते में ठोंकाइल बा चूल्हा चउका. सब पढ़ल लिखल बेकार हो जाले रउरा सब मरदन का फेर में. मेहरारू कुछ दोसर करे लागे त रउरा लोग के मरदानगी के ठेस नू पहुँचेला.

बस करऽ भउजी. बात मत बढ़ावऽ. चलऽ कुछ दोसर बतियावल जाव.

कुछ त कहीं...

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