– जयंती पांडेय

बाबा लस्टमानंद सरकार के बयान से रिग के कहले, आजकल सब काम गिरहथे खातिर हो रहल बा. अब देखऽ ना रामचेला सरकारी कर्मचारी लोग के महंगाई भत्ता बढ़ल लेकिन ई सब गिरहथे के खातिर हो रहल बा. अब सेना में एक रैंक एक पेंशन के फैसला हो गइल आ इहो गिरहथे के खातिर हो गइल, काहे कि जवान आ किसान के नाता पुरान हऽ. त जवान के बारे में जवन भइल ऊ किसाने खातिर न भइल. अब देखऽ न सरकार एफ डी आई ले आ रहल बिया त किसाने खातिर हो रहल बा. अब जे जरतमुअना लोगा बा ऊ झठहुं कहत बा कि अमरीका खातिर हो रहल बा, अमरीका के सेठन खातिर ला रहल बिया आ अमरीकि कम्पनी खातिर ला रहल बिया.

अब देखऽ एफ डी आई संगे जे कम्पनी अइहें सन ऊ गांव में सड़क बनइहें सन. एऋ खातिर ना कि गिरहथ लोग शहर में आ सके. ऊ त सड़क एह से बनवइहें सन कि ऊ गांव में गिरहथन तक जा सके. ओकनी के मड़ई के सामने जा के गादे क सके कि आइल बानी सन, जइसे नेता लोग मड़इन तक जा के वोट मांगे ला लोग. कबो कबो त दुअरा पर खड़ा हो के कहे ला लोग आज तहरे घरे खायेब. अब ओकर हाल का होला, जरा सोचऽ जेकरा अपने चाहे बाल बचा के खिआवे खातिर नइखे ऊ का उनका के खिआई. ओकर हाल त ई होला कि कबहीं ऊ आपन आटा के खाली टीना देखे ला कबहीं नेता जी के चेहरा. लेकिन एफ डी आई वाला लोग त किसान के दुअरा खड़ा हो के नेता अइसन ना कही लोग आ ना सूदखोर बनिया अस कही कि जेजाद हो गइल हमार कर्जा फेरऽ. ऊ त एकदम दोकनदार अइसन बोलिहें सन कि हम तहार फसल कीने के चाहऽतानी, तूं का बेचब. थोड़े तरकारी चाहे गेहूं चाहे धान जवन बेंचे के बा बेचि द. ऊ लोग किसान खातिर ठडा घर बनवा दी पूरा ढांचा खड़ा करी ताकि फसल बरबाद ना होखो. तबो कुछ जरत मुअना लोग लगातार कहऽता कि एह से किसान के गति निलहा किसान के हो जाई. आज देश में जवन घोटाला हो रहल बा सब किसाने खातिर हो रहल बा. महाराष्ट्र में करोड़ो रुपिया के सिंचाई घोटाला हो गइल ओहू के लोग कहऽता कि ई सब किसाने खातिर भइल बा. देखऽ सब लोग मिल के माने नेता, लुटेरा आ ठीकदार सब मिल के किसान के भलाई में लागल बा आ किसान बाड़े सन कि सुधरत नइखन सन. चाहे त विरोध में लाठी ले के खड़ा हो जा तारे सन आ चाहे त आत्महत्या क ले तारे सन.


जयंती पांडेय दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में एम.ए. हईं आ कोलकाता, पटना, रांची, भुवनेश्वर से प्रकाशित सन्मार्ग अखबार में भोजपुरी व्यंग्य स्तंभ “लस्टम पस्टम” के नियमित लेखिका हईं. एकरा अलावे कई गो दोसरो पत्र-पत्रिकायन में हिंदी भा अंग्रेजी में आलेख प्रकाशित होत रहेला. बिहार के सिवान जिला के खुदरा गांव के बहू जयंती आजुकाल्हु कोलकाता में रहीलें.

कुछ त कहीं...

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.