ना ओनिये के ना एनिये के – बतंगड़ 72

– ओ. पी. सिंह

अबकी के बजट का बाद फेरु इयाद आ गइल भोजपुरी कवि अशोक द्विवेदी के एगो कविता के अंश – बीच के अदिमी ससुरा, ना ओनिये के ना एनिये के. कूल्हि ठसक आ इमानदारी केने दो घुसुर गइल बा.
कविता लमहर बा आ पूरा कविता एहिजा दिहला के ना त कवनो जरुरत बा ना जगहा. बस इहे बतावे के बा कि बीच के आदमी हमेशा से पिसात आइल बा. ऊपर वाला का लगे सब कुछ बा जवना से ऊ आपन हर हालात सम्हारि सकेला. नीचे के आदमी जतने में बा ओतने में खुश बा. आजु क काम चलि जाव अतने में संतुष्ट. बीच के आदमी लालसा के सतवाँ घइला भरे का फेर में आपन जिनिगी खराब कइले जात बा. कमाई का फेर में ओकरा लगे समय नइखे. अपना परिवार ला के कहो ऊ खुद अपनो ला समय नइखे निकाल पावत. थोड़ बहुत बाचतो रहुवे त फेसबुक आ सोशल मीडिया का फेर में उहो लाग जात बा. लालसा के सतवाँ घइला के खासियत होला कि ऊ कबो भरे ना. जतने पावत जाई ओतने के लालसा अउरी बढ़त जाई. इन्दिरा गाँधी का जमाना में रुपिया में 97 पइसा टैक्स में दे देबा वाला आदमी आजु तैंतीसो पइसा दे के परेशान बा. सरकार के दस फीसदी ना देबे के पड़े एकरा फेर में ऊ आपन सौ पइसा गँवावे ला तइयार बा. ना कमाएब ना टैक्स देबे के पड़ी. ओकर नाराजगी एह हद ले सोझा आ जाता कि ऊ लूटेरा आ धाटालाबाजन के भोट देबे के धमकी देबे लागल बा. कुछ मामिला में ओकर शिकायत जायज कहल जा सकेला. नौकरी पेशा वाला आदमी के टैक्स पहिलहीं कटि जाला आ ऊ एकरा के कवनो तरह लुका छिपा ना सके. बिजनेस आ धंधा में लागल लोग का लगे हतार तरीका बा आपन टैक्स चोरावे के. अलग बाति बा कि वित्त मंत्री का नजर में ई बाति निकहा से आ गइल बा ऊ कवनो ना कवनो तरीका से एकरा पर काबू पावे का कोशिश में बाड़न. बीच के अदमी इहो ले के परेशान बा.
आ अब बजट में लुकाइल राजनीतिक मकसदो प चरचा क लीहल बेकार ना कहाई. मोदी नाम के नेता के सबले बड़का खूबी ह कि ऊ मैच हमेशा अपने मैदान में करावेलन. हर चुनाव में मैदान बदलि लीहल उनुकर रणनीति में शामिल होले. अबकिओ के मैच उनुके मैदान में होखे जा रहल बा से एह बजट से ई साफ हो गइल. किसान, दलित, गरीब, आ गाँव खातिर एह बजट में सरकार के खजाना खोल चुकल मोदी सरकार आधी मैदान त अइसहीं जीत लिहले बिया. अब देखै वाली बाति होखी कि विपक्ष एकर काट का खोजत बा, हिन्दुवन के बाँट के मोदी के हरावे वाली विपक्षी रणनीति अब काम नइखे आवे वाला. देश के टुकडे़-टुकड़े करावे वाला गैंग के पोसल बेकार साबित होखे जा रहल बा. हार्दिक अल्पेश आ जिग्नेश वाली तिकड़ी के तिकड़म एह मैदान में कामे आवे वाला नइखे.
आ अब चलत-चलत हाल के उपचुनावो के चरचा क लीहल जाव. राजस्थान आ पश्चिम बंगाल में भइल तीन गो लोकसभा सीट आ दू गो विधानसभा सीटन के पाँचो चुनाव हारिओ के भाजपाई भक्त मगन लउकत बाड़ें. बंगाल का चुनाव में उनुका एह बाति के खुशी बा कि कांग्रेस आ बँवारा गठबन्हन के पछाड़ के भाजपा टीएमसी के असत मुकाबिला में आ गइल बिया. राजस्थान के चुनाव हारल आगे फायदा देबे जा रहल बा. पाँचो सीट जीतेवाला विपक्ष अबकी ईवीएम मशीन के गड़बड़ी के बाति नइखे करत. आ अगिला लोकसभा चुनाव में जब ओकरा हार मिली तब ऊ एकर शिकायत करे जोग ना रहि जाई. वइसे नोट करे जोग इहो बा कि अह पाँचो में से कवनो सीट पर प्रचार करे ना गइल रहलें बबुआ. लोकसभा में त उनुका जाहीं के पड़ी. आ ऊ कुछ ना कुछ अइसन करिये दीहें जवना के ढोल बजा दी भाजपा. दोसरा का घर प ढेला फेंके वाला के आपन घर बिना काँच वाला होखे के चाहीं. आ सूट बूट वाली सरकार प अछरंग लगावे वाला बबुआ के खुद सत्तर हजार के जैकेट ना पहिने के चाहीं.

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