भउजी हो! का बबुआ? काल्हु चौक प एगो आदमी के देखनी जे अगहन में जोगीरा गावत रहुवे. होखी कवनो पागल. अइसनका लोग से दूरे रहे के चाहीं. ठीके कहतारू भउजी. ऊ ससुरा छाती ठोक-ठोक के अपना के हरामजादा साबित करे में लागल रहुवे. कहत रहुवे कि ओकरा नइखे मालूम किपूरा पढ़ीं…

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