नेपाल भोजपुरी समाज, वीरगंज के आयोजन में महान संत तुलसीदास जी के जीवन प्रसंग पर लिखल आपन मशहूर भोजपुरी खंडकाव्य “रमबोला” के एकल पाठ भोजपुरी आ हिंदी के पुरनिया साहित्यकार डॉ. हरीन्द्र हिमकर में कइनी. नेपाल के भोजपुरी हृदयस्थली वीरगंज (नेपाल के प्रवेश द्वार) के वीरगंज पब्लिक कॉलेज में जबपूरा पढ़ीं…

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– हरेन्द्र हिमकर धरती के रग-रग में भइल राग अदिमी -अदिमी हो गइल नाग डंसलनि समाज के पोर-पोर देहिया-देहिया में लगल आग। अंगे-अंगे धहकल धिधोर धरती लिहली अॅंचरा बिटोर तब धू-धू-धू सब ओर मचल रीसे लागल अॅंखिया करोड़। राजा से रूस गइल रानी होखे लागल खींचा-तानी राजा परजा के मेलपूरा पढ़ीं…

– हीरालाल हीरा 1) हारि के वानर सिन्धु कछार बिचारेले के अब प्रान बचाई? फानि पयोनिधि के दस कन्धर के नगरी, जियते चलि जाई? राक्षस के पहरा दिन-राति सिया के सुराग कहाँ लगि पाई? जो न पता लगिहें त सखा सुग्रीव से बोलऽ ना का जा कहाई? 2) बुद्धि नपूरा पढ़ीं…