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निर्गुण आ भजन – गोपाल दूबे

निर्गुण – देह दुनिया भरम ह बलवान करम गति,भीतरी के सांच भीतरीये पहचान ले,बुद्धि कुबुद्धि के फेरा में उलझि मत,नर सेवा ही सांचो नरायन जप मान ले. केतनो तू मंहगा…