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प्रेम में डूबल औरत अउर हम : दू गो कविता

– अल्पना मिश्र (1) प्रेम में डूबल औरत प्रेम में डूबल औरत एक-एक पल-छिन सहेजत-सम्हारत रहेले। ‘कइसे उठाईं ई ‘छन’ कहाँ धरीं जतन से…’ इहे सोच-सोच के कई बरिस ले…

दइब टेढ़ भइले करमवो बा फूटल : गजल

– रामयश अविकल चलीं ई सबुर के बन्हल-बान्ह टूटल कमाये बदे आज घर-गाँव छूटल। मिलल मार गारी, मजूरी का बदला सरेआम अब आबरू जाय लूटल। भवन तीन-महला शहर में बा…

भोजपुरी-वर्तनी के आधार

– स्व. आचार्य विश्वनाथ सिंह (ई दस्तावेजी आलेख एह खातिर दिहल जाता कि भोजपुरी लिखे-पढे़े में लोगन के सहायक-होखो) भोजपुरी भाषा में उच्च कोटि के साहित्य-रचने करे खातिर ना, ओकर…

लोकजीवन के ‘बढ़नी’ आ ‘बढ़ावन’

– डा॰ अशोक द्विवेदी ‘लोक’ के बतिये निराली बा, आदर-निरादर, उपेक्षा-तिरस्कार सब के व्यक्त करे क ‘टोन’ आ तरीका अलगा बा. हम काल्हु अपना एगो मित्र किहाँ गइल रहलीं, उहाँ…

निरउठ

– डा. अशोक द्विवेदी दिल्ली फजिरहीं पहुँच गउवीं. तर-तरकारी कीने क बेंवत ना बइठुवे त सोचुवीं आलुवे-पियाज कीनि लीं. दाम पुछते माथा घूम गउवे. साठ रुपिया किलो पियाज रे भइया.…

कबहुँ न नाथ नींद भरि सोयो

– कमलाकर त्रिपाठी बाँके बिहारी घर से दुई-तीन कोस चलल होइहँ कि ओनकर माई चिल्लइलिन, ”रोका हो गड़िवान, दुलहिन क साँस उल्टा होय गइल.“ बाँके लपक के लढ़िया के धूरा…

लाल निशान

– बिन्दु सिन्हा किर्र…. दरभंगा सकरी रोड पर सन्नाटा भइला से बस आउर ट्रक के चाल अइसहीं तेज हो जाला. झटका से ब्रेक लेला से खूब तेज चलत ट्रक एक-ब-एक…

रोेजे सुख के साँझ निहारत, जागेला भिनसहरे गाँव

भोजपुरी के रूप-रंग, सुभाव, संघर्ष आ कबो हार ना माने के प्रवृति ओकर आपन खासियत ह. नियतु आ भ्रष्टाचार का पाटन में पिसा, श्रम संघर्ष आ जिजिविषा का बूते उठ…