हद, हदस, हदसल, हदसावल, हदसी, हदीस, हादसा. मामिला बेहद गंभीर बा आ बतकुच्चन करे में मन हदसल बा कि पता ना कब केने से इशरत के अब्बा भा वानी के फुआ सामने आ जइहें घेर बान्ह करे खाति. से हम अपना हद में रहे के भरपूर कोशिश करब. आ कुछपूरा पढ़ीं…

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अबकी ढेर दिन बाद संपादक जी से आदेश मिलल कि बतकुच्चन के नया कड़ी भेजल जाव त खुशीओ मिलल आ घबराहटो भइल. काहे कि एने ढेर दिन से कलम उठावे के आदत छूट गइल रहे. अब एकरा के का लुकाईं कि सन्मार्ग में छपल बन्द भइला से मन उदास होपूरा पढ़ीं…

बात के खासियते होला कहीं से चल के कहीं ले चहुँप जाए के. कहल त इहो जाला कि एक बार निकलल ध्वनि हमेशा खातिर अंतरिक्ष में मौजूद हो जाले. आजु पइसार आ पसार के चरचा करे बइठल हम त पसोपेश में बड़ले बानी कि कहाँ से शुरु कइल जाव. काहेपूरा पढ़ीं…

सरकार बदलले एक साल बीतल बा आ देश मे बतकही के दौर जारी बा. ई बतकही कब बतकही में बदल जाई केहु ना बता सके. बातचीत कब बाताबाती हो जात बा बुझाते नइखे. सरकार कुछ बोलत ना रहुवे त शिकायत रहुवे कि सरकारो के मालूम बा कि ओकरा लगे बतावेपूरा पढ़ीं…

कबो ट्रेन के टाइम त कबो हवाई जहाज के टाइम का चलते अनसोहाते मौका मिल जाला बतकुच्चन से आराम करे के. सोहाव त ना बाकिर कुछ देर ला सोहावन जरूर लागेला. आ आज एहीसे अनसोहाते पर बतकु्च्चन करे के मन बनवले बानी. अब रउरा एहसे अनस आवे, रउरा अनसा जाईं,पूरा पढ़ीं…

जय हो बाबा लस्टमानंद के! पिछला अतवार के घूर के चरचा में अइसन टीप दिहलन कि सोचल धरा गइल आ हम घूर का घुरची में घुरचिया के रह गइनी. सोचे लगनी त लागल कि आखिर हम बतकुच्चन में करेनी का, घुरबिनिया छोड़ के. बाकिर घूर आखिर कइसे अतना इज्जति पापूरा पढ़ीं…

भासा संस्कार से बनेला आ संस्कार भासा से. भासा संस्कार देखावेले आ संस्कार भासा के इस्तेमाल के कमान सम्हारेले. कमान सम्हारे खातिर कई बेर कमानी चढ़ावे पड़ेला आ कई बेर कमाने से काम चल जाला. एह कमाने आ कमाई वाला कमाने के कवनो संबंध ना होखे. कमाने कहे के मतलबपूरा पढ़ीं…

भोजपुरी के खासियत ह कि एकरा में नया शब्द गढ़े के अपार बेंवत मौजूद बा आ इहे एकर कमजोरियो साबित हो जाले कई बेर. हिन्दी के विद्वान लोग जब भोजपुरी लिखे चलेला त अकसरहाँ ओह लोग के संस्कृतनिष्ठ हिन्दी आ व्याकरण बोध हावी रहेला आ फरक पड़ेला त बस क्रियापूरा पढ़ीं…

कंप्यूटर के दुनिया में दू तरह के साफ्टवेयर होला. एगो त प्रोप्राइटरी, जवना के मलिकान कुछ खास लोग का लगे होला आ उहे लोग तय कर सकेला कि एहमें का रही, कइसे रही, का करी वगैरह. दोसरका होला ओपन सोर्स, जवना के मलिकान केहू का लगे ना होखे. जेकरे मनपूरा पढ़ीं…

कहे खातिर त तुलसिए बाबा कह गइल बानी कि ठठा के हँसल आ गाल फुलावल एके साथे ना कइल जा सके. बाकिर आजु के जमाना में एह तरह के नमूना आए दिन देखे के मिले लागल बा. संगही रहि के एक दोसरा से घात करे के चलन बढ़ल जात बा.पूरा पढ़ीं…

भन दे गन दऽ ना त दन दे हने लागब. तेजी के मापल जाव त ‘दन दे’ से तेज ‘भन दे’ होला. दन दे कहला क मतलब कि जल्दी से आ भन दे के मतलब ओकरो ले तेजी से. गन दऽ असल में गिन दऽ केउच्चारण दोस ह बाकिर गनलपूरा पढ़ीं…