(स्मरण – आचार्य गणेशदत्त ‘किरण’) (पाती के अंक 62-63 (जनवरी 2012 अंक) से – 8वी प्रस्तुति) – प्रभाष कुमार चतुर्वेदी (आखिरी पाँच बरिस) कविता केसर का गंध जइसन मादक आ पागल बनावे वाली होले. कवि के रचना पर कवि अपना आ पाठक लोग साथे सुनवइयो लोग के पागल बना देलापूरा पढ़ीं…

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(इयाद) (पाती के अंक 62-63 (जनवरी 2012 अंक) से – 7वी प्रस्तुति) – आचार्य गणेश दत्त ‘किरण’ जन्म: मई 1933 मृत्यु : सितंबर 2011 गहिर संवेदना, इतिहास-बोध, पौराणिक लोक-परम्परा के समझ आ कल्पना-प्रवणता वाला आचार्य गणेशदत्त ‘किरण’ भेजपुरी भाषा के प्रतिभाशाली आ समर्पित कवि-रचनाकार रहलन. भोजपुरी के भूषण नॉँव सेपूरा पढ़ीं…

(थाती) (पाती के अंक 62-63 (जनवरी 2012 अंक) से – 6वी प्रस्तुति) जन्म: 1906 मृत्यु: 21 जुलाई 1971 पेशा से चिकित्सक, बांसडीह, बलिया निवासी ‘सुमित्र’ जी के एगो प्रौढ़ काव्य-संग्रह भोजपुरी ‘गाँव गिरान’ 1956 में प्रकाशित भइल रहे. राष्ट्रभाषा परिषद् पटना से प्रकाशित “भोजपुरी के कवि और काव्य” में. उनकरपूरा पढ़ीं…

(पाती के अंक 62-63 (जनवरी 2012 अंक) से – 5वी प्रस्तुति ) – ‍शशि प्रेमदेव गाँधी जी के बानर, बनि गइले पर नीक कहाइबि हम। साँच बात कहि के ए दादा, माथा ना फोरवाइबि हम। मन के कहना मान लेबि तऽ कबहूँ ना पछताइबि हम। बेसी चतुर बनबि तऽ बीचपूरा पढ़ीं…

पाती के अंक 62-63 (जनवरी 2012 अंक) से – 4थी प्रस्तुति – ‍हीरालाल ‘हीरा’ अकसर एके संगे खइले सँगे मदरसा पढ़हू गइले एक्के अँगना खेलत-कूदत दिन-दिन बढ़ल उमिरिया रे। दू भई का नेह क चरचा सगरो गाँव नगरिया रे । भव भरल भटकाव न कवनो निश्छल हिया, दुराव न कवनोपूरा पढ़ीं…

सामयिकी आधी आबादी के बदलत चेहरा – ‍आस्था जिनिगी में, हार, असफलता आ पीछे छूटि गइल आम बात हऽ. सपना पूरा ना भइल त एकर मतलब ई ना हऽ कि सपना देखले छोड़ दिहल जाव. उमेद मुए के ना चाहीं. उमीद आ सपना जिया के राखल आ ओके पूरा करेपूरा पढ़ीं…

दखल नया बदलाव क इतिहास रचे वाला साल के विदाई ! – ‍प्रगत द्विवेदी नया साल के खुशमिजाज सलाम का साथे, बीतल बरिस के खटमिठ अनुभवन क इयाद आइल. नवका सत्र के, नया ‘सनेस‘ में हमके इहे बुझाइल कि हमहन के देश तमाम तरह के संकटन से उबरत, ‘भ्रष्टाचार‘ सेपूरा पढ़ीं…

(हमार पन्ना) [एक] ‘भ्रष्टाचार’ पर राजनीति आ लोकतंत्र के ‘लोकपाल’ सर्वव्यापी राजनीति के पहुँच आ पइसार हर जगह बा त हमनी के जीवन क जरूरी हिस्सा बनल भ्रष्टाचार भला काहें अछूता रही? राजनीति में भ्रष्टाचार आ भ्रष्टाचार पर राजनीति अब ओह निर्णयक मोड़ पर पहुँच गइल बा, जहाँ तय कइलपूरा पढ़ीं…