– हरेंद्र हिमकर कहिया ले अाशा के तमाशा चली भाई लोगिन ? कहिया ले दिल्ली के दुलारी भोजपुरिया? कहिया ले मान मिली माई भोजपुरिया के? कहिया ले बात से ठगाई भोजपुरिया? माई के जो मान ना त काथी के गुमान भाई? कईसे चलता सीना तान भोजपुरिया? आठवीं सूची मे नामपूरा पढ़ीं…

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– डा0 प्रकाश उदय केहू दिवंगत हो जाला त आमतौर पर कहल जाला कि भगवान उनुका आत्मा के शांति देसु। हमार एगो कवि-मित्र कहेले कि बाकी लोग के त पता ना, बाकिर कवनो रचनाकार खातिर अइसन बात ना कहे के चाहीं। शान्त आत्मा से कवनो रचना त हो ना पाईपूरा पढ़ीं…

– डॉ अशोक द्विवेदी सोशल मीडिया का एह जमाना में वाट्स ऐप,फेसबुक पर, नोकरी-पेशा आ स्वरोजगार में लागल, पढ़ल – लिखल लोग अभिव्यक्ति के माध्यम का रूप में मातृभाषा के अपनवले बा। ऊ झिझक, ऊ संकोच हट गइल बा जवन भाषाई-इन्फिरियरिटी का कारन बनल लागत रहे। मध्यवर्गी, निम्न मध्यवर्गी परिवारपूरा पढ़ीं…

बहुते कम समय में देश विदेश के भोजपुरिया दर्शकन के दिल में अपना ला नेह भरल जगहा बना लेबे में कामयाब रहल महुआ प्लस अब अपना देखनिहारन के एगो नया कलेवर आ नया रंग-रूप में नज़र आई अब. महुआ प्लस पहिलही से अपना एक ले बढ़के एक बेहतरीन रिएलिटी शोजपूरा पढ़ीं…

भोजपुरी के जुबली स्टार दिनेश लाल यादव निरहुआ आ गरम लिट्टी अंजना सिह के जोड़ी के फिलिम – जिगर – अबकी का ईद का मौका प 23 जून के रिलीज होखे वाली बिया. संजोग बा कि एही दिने सलमानो खान के फिलिम टयूबलाइट के रिलीज होखल पहिले से तय बा.पूरा पढ़ीं…

डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल के डायरी प्राचार्य डॉ. संजय सिंह ‘सेंगर’ आजु स्टाफ रूम में इंस्पेक्शन के बात एक-एक क के उघरत रहे. हमरा प्राचार्य डॉ. संजय सिंह ‘सेंगर’ जी याद आ गइल रहीं आ हम भावुक हो गइल रहीं. 5 जनवरी के उहाँ से खड़े-खड़े भइल आधा घंटा केपूरा पढ़ीं…

लिटी-चोखा – डॉ. कमल किशोर सिंह आहार अनोखा लिटी चोखा का महिमा हम बखान करीं. ई ‘बर्बाकिउ बिचित्र बिहारी’ बेहतर लागे घर से बहरी, दुअरा-दालान, मेला-बाज़ार, कहंवो  कोना  में  छहरी. नहीं  चुहानी  चौका-बर्तन बस चाही गोइठा-लकड़ी. मरदो का मालूम मकुनी में मर-मसाला कवन परी. आलू, प्याज, टमाटर, बैगन बनेला चोखापूरा पढ़ीं…

भोजपुरी आज दुनिया के सोलह गो देश में आ देश के कई राज्य – बिहार, यू.पी., दिल्ली, मध्य प्रदेश, झारखंड, छतीसगढ़, महाराष्ट्र, गुजरात वगैरह में करोड़ो लोग द्वारा बोलल जाता बाकि अबही ले एकरा के संविधान में दर्जा ना मिलल. जबकि एकरा से कम बोलेवाला भाषवन के संविधान के आठवींपूरा पढ़ीं…

– अशोक द्विवेदी ओढ़नी पियर, चुनरिया हरियर / फिरु सरेहि अगराइल जाये क बेरिया माघ हिलवलस, रितु बसन्त के आइल! फुरसत कहाँ कि बिगड़त रिश्ता, प्रेम पियाइ बचा ले सब, सबका पर दोस मढ़े अरु मीने-मेख निकाले सीखे लूर नया जियला के, उल्टे बा कोहनाइल !! क्रूर-समय का अँकवारी में,पूरा पढ़ीं…

(वसन्त पंचमी, 1ली फरवरी 2017, प मंगल कामना करत) – अशोक द्विवेदी कठुआइल उछाह लोगन के, मेहराइल कन -कन कवन गीत हम गाईं बसन्ती पियरी रँगे न मन !! हर मजहब के रंग निराला राजनीति के गरम मसाला खण्ड खण्ड पाखण्ड बसन्ती चटकल मन – दरपन !! गठबन्धन के होयपूरा पढ़ीं…

डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल के डायरी रसियाव खाईं आ टन-टन काम करत रहीं आजु स्टाफ रूम में अपना गीत के एगो लाइन गुनगुनात रहीं- “ननदी का बोलिया में बने रसियाव रे. सरगो से नीमन बाटे सइँया के गाँव रे.“ साहा सर के जिग्यासा पर चर्चा शुरू हो गइल कि “रसियावपूरा पढ़ीं…