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हजार का नोट पर छाप दिहल गाँधी

September 24, 2011 OmPrakash Singh 1

– शैलेश मिश्र हम अन्ना ना भारत सरकार के समर्थक हईं करोड़ो का आबादी में बेबस बेकार हईं जनम से आजुले भठियरपन के संरक्षक हईं. […]

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ई जग ह भ्रष्टाचारी !

May 1, 2011 OmPrakash Singh 0

– जयंती पांडेय बाबा लस्टमानंद लमहर सांस घींच के कहले, हो राम चेला ई कुटिल, कपटी जुग में अबहियों कातना लोग भेंटाता ई कहे वाला […]

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जो दिल खोजा आपना…….

April 1, 2011 OmPrakash Singh 0

– प्रभाकर पाण्डेय “गोपालपुरिया” आजु जी बहुत उदास बा. ए उदासी के कारन हम खुदे बानी. हमरा ई लागत रहल ह की भारत में जवन भ्रस्टाचार […]