नेपाल भोजपुरी समाज, वीरगंज के आयोजन में महान संत तुलसीदास जी के जीवन प्रसंग पर लिखल आपन मशहूर भोजपुरी खंडकाव्य “रमबोला” के एकल पाठ भोजपुरी आ हिंदी के पुरनिया साहित्यकार डॉ. हरीन्द्र हिमकर में कइनी. नेपाल के भोजपुरी हृदयस्थली वीरगंज (नेपाल के प्रवेश द्वार) के वीरगंज पब्लिक कॉलेज में जबपूरा पढ़ीं…

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भोजपुरी साहित्य से हमार पहिलका परिचय जवना रचना से भइल तवन रहल हरीन्द्र हिमकर जी के लिखल खण्डकाव्य रमबोला के एगो अंश से. रचना अस नीक लागल कि रटा गइल आ जबे मौका मिले एकरा के सुना के बतावल करीं कि देखीं भोजपुरी में कतना मजगर रचना लिखल जा रहलपूरा पढ़ीं…

– हरेन्द्र हिमकर धरती के रग-रग में भइल राग अदिमी -अदिमी हो गइल नाग डंसलनि समाज के पोर-पोर देहिया-देहिया में लगल आग। अंगे-अंगे धहकल धिधोर धरती लिहली अॅंचरा बिटोर तब धू-धू-धू सब ओर मचल रीसे लागल अॅंखिया करोड़। राजा से रूस गइल रानी होखे लागल खींचा-तानी राजा परजा के मेलपूरा पढ़ीं…

– ओम प्रकाश सिंह साल 1975 भा 1976 रहुवे जब पहिला बेर हमरा एगो भोजपुरी के खण्डकाव्य रमबोला के जानकारी एगो दोस्त से मिलल. ऊ हमरा के ओह काव्य के एगो अंश भेजले रहुवन जवना के हम आपन एगो पत्रिका भोजपुरिहा के पहिलका अंक में शामिल कइले रहीं. वइसे तपूरा पढ़ीं…