Tag: राधेश्याम केसरी

सावन -सिसक गइल बा

– डॉ राधेश्याम केसरी ढहल दलानी अब त सउँसे, पुरवइया क झांटा मारे, सनसनात ठंढा झोका से, देहिया काँप गइल बा। मेजुका-रेवां गली- गली में, झेंगुर छोड़े मिठकी तान, रोब…

माई

– डॉ राधेश्याम केसरी हमरे से खनदान पटल बा, जिनिगी से जज्बात जुड़ल बा हम हमार, घर दुअरा खातिर सबसे पहिले तोहरा खातिर उठ खटिया से रोज सबेरे जिनगी तोड़ी…

केतना बदल गइल संसार

– डॉ राधेश्याम केसरी केतना बदल गइल संसार, कतहुँ नइखे अब त प्यार। खाली लाभ के खातिर, झूठे बनल बनवटी प्यार। बचवन के फुटपाथे असरा, बाप छोड़ जिमेवारी भागल। छोड़…

आइल गरमी

– डॉ राधेश्याम केसरी सूरज खड़ा कपारे आइल,गर्मी में मनवा अकुलाइल। दुपहरिया में छाता तनले,बबूर खड़े सीवान। टहनी,टहनी बया चिरईया, डल्ले रहे मचान। उ बबूर के तरवां मनई, बैईठ ,बैईठ…

बसंत प दू गो कविता

– डॉ राधेश्याम केसरी 1) आइल बसंत फगुआसल सगरी टहनियां प लाली छोपाइल, पछुआ पवनवा से अंखिया तोपाइल, देहिया हवे अगरासल, आइल बसन्त फगुआसल। कोयल के बोल अब खोलेला पोल,…