का लिखीं बुझाते नइखे

- लव कान्त सिंह "लव" कुछो अब सोहाते नइखे, का लिखीं बुझाते नइखे। नेता कोई गद्दार लिखीं, डाकू के सरदार लिखीं, चोर के पहरेदार लिखीं, कि गरीब के अलचार लिखीं,…

प्रीत के गीत हरदम सुनाइले हम

- लव कान्त सिंह बा अन्हरिया कबो त अंजोरिया कबो जिनगी में घाम बा त बदरिया कबो प्रेम रोकला से रुकी ना दुनिया से अब होला गोर से भी छोट…

चलs ना फेर से भाई बनल जाओ भाई

- लव कान्त सिंह दरद हिया के छुपा रहल बानी लोर पोंछ के मुस्का रहल बानी. कांट के बगिया में हमके फेंकल केहू बनके फूल ओजा भी फुला रहल बानी.…

दिल्ली में मंचित भइल भोजपुरी नाटक “ठाकुर के कुइयाँ”

इन्टरनेट आ तकनीक के जमाना में रंगमंच आ रंगकर्म ओहू में भोजपुरी के रंगमंच के जिन्दा राखल भी पहाड़ चीर के रास्ता बनवला से तनिको कम नइखे. दिल्ली में नाटक…