– जयंती पांडेय बाबा रामदेव आ अण्णा हजारे का देखादेखी नाँव कमाये के गरज से बाबा लस्टमानंदो एगो दल बनवले “विलेज दल”, आ शुरू कइले मीटिंग. कई गाँव के लोग एकट्ठा भइल. लमहर लमहर भाषण भइल, लोग के चेहरा भ्रष्टाचार का खिलाफ किरोध से भरल रहे. लोग दाँत पीसर, किटकिटातपूरा पढ़ीं…

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– जयंती पांडेय रामचेला पूछले बाबा लस्टमानंद से कि ई जूता बड़ा अजीब चीज ह. बाबा कहले, हँ एकर लमहर इतिहास बा, अब देखऽ ना कुछ साल पहिले बगदाद में एगो पत्रकार महोदय जार्ज बुश पर जूता तान दिहले. बुश भअई ओह घरी अमरीका के राष्ट्रपति रहले. अब ओकरा बादपूरा पढ़ीं…

– जयंती पांडेय रामचेला बड़ा उदास रहले. बाबा लस्टमानंद पूछले कि का हो मुँह काहे लटकवले बाड़ऽ ? रामचेला कहले, ई मीडिया वाला भाई लोग केहू तरह जीये ना दी. अब देखऽ ना, ओह दिन राजघाट पर अनशन पर बइठल भाजपाई भाई लोग के उदासी मेटावे खातिर भाजपा के बड़हनपूरा पढ़ीं…

– जयंती पांडेय बाबा लस्टमानंद आ रामचेला हरान बाड़े ई जान के कि उनहुं के नेताजी के एगो स्विस बैंक एकाउंट बा. ऊ त आजु काल्हु भ्रष्टाचार पर बयान सुन के हरान बाड़े. बयान अइसन गिरऽता जइसे नेतवन के ईमान, इनकर गिरऽता उनकर गिरऽता. इहाँ ले कि हाल में बाबापूरा पढ़ीं…

– जयंती पांडेय रामचेला बाबा लस्टमानंद से पूछले कि आजुकाल्ह आतना झगड़ा काहे बढ़ गइल बा. बाबा खखार के कहले, बड़ बूढ़ लोग कहि गइल बाड़े कि दुनिया भर के झगड़ा जर जोरू आ जमीन के ले के होला. इहवां जर माने सोना चांदौ आ रुपिया पइसा के बात नइखे,पूरा पढ़ीं…

– जयंती पांडेय जबसे पाँच राज्यन में चुनाव भइल तबसे रामचेला बड़ा मायूस हो गइले. मुँह सुथनी अस बना लिहले आ चेहरा ओल अस लटका लिहले. बाबा लस्टमानंद के बड़ा माया लागल. लगे जा के पूछले का, हो रामचेला ! बड़ा उदास लागत बाड़ऽ ? ऊ बोलले, जान जा बाबापूरा पढ़ीं…

– जयंती पांडेय बाबा लस्टमानंद अपना मड़ई में शांति से बइठल रहले कि रामचेला आ धमकले. उनुका के देखते बाबा कहले, “हो ई दुपहरिया में केने चलल बाड़ऽ?” रामचेला कहले, “महँगू के धियवा के बिआह बा, चलऽ चार गो गाड़ी बान्हे के बा. जोर के लगन बा आ गाड़ी मिलतेपूरा पढ़ीं…

– जयंती पांडेय पुरनका जमाना से हीरोइन सभे इहे गावे. अउर खाली हीरोइने के मन के नाहीं बाकी सब मेहरारू के मन के इहे भावे कि उनके बलम मोटरकार पर चढ़ के आवस. अब केतना मेहरारून के भाग में भलही इहे लिखल होखे कि बिआहे के बेरा उ मोटरकार परपूरा पढ़ीं…

– जयंती पांडेय बाबा लस्टमानंद लमहर सांस घींच के कहले, हो राम चेला ई कुटिल, कपटी जुग में अबहियों कातना लोग भेंटाता ई कहे वाला कि “हम आजु ले कवनों भ्रष्टाचार नइखी कइले. नाजायज पइसा के हाथ से छुअल का हम त ओकरा इयोर तकबो ना करीले. एकदम हम पांकीपूरा पढ़ीं…

– जयंती पांडेय सियावर बाबू के मुँह पर बड़ा दिन का बाद हँसी लउकल. बाबा लस्टमानंद से ना खेपाइल. सियावर बाबू सरकारी अफसर हउवन. सरकारी कर्मचारी अउर आफिसन के बारे में सब कुछ जाने ले. एही से जब ऊ भेंटास त मुँह माहुर अस कइले रहस. बाबा का संगे एगोपूरा पढ़ीं…

– जयंती पांडेय एकदिन एगो नेताजी अपने दुलरुआ बेटा से पूछले – बाबू रे, तें आगे जा के का बने के चाहऽतारऽ ? माने कि जिनिगी में आगे जा के का करे के इरादा बा ? उनुकर बेटा टप दे कहलसि – बाबूजी, हम त आगा चल के नेता बनब.पूरा पढ़ीं…