– जयंती पांडेय नेताजी भाजपा के हाहर में जीत गइले आ मंत्रियों हो गइले. जहां उनका बंगला मिलल ओह में एगो कटहर के पेड़ रहे. मंत्री जी रोज सबेरे उठि के गाछ पर के कटहर गिनस. एक दिन अचके में लगले चिलाये कि गाछि पर काल्हु ले एगारह गो कटहरपूरा पढ़ीं…

Advertisements

– जयंती पांडेय रामचेला लइकन के बतावत रहले कि अंधेर नगरी के माने का होला. ओकरा खातिर जरूरत होला चौपट राजा के. बिना चौपट राजा के अंधेर नगरी होइये ना सके. तले बाबा लस्टमानंद कहले हो राम चेला ई कहानी सब पुरान जमाना के ह आ आजुकाल्हु एकर माने होलापूरा पढ़ीं…

– जयंती पांडेय लस्टमानंद के नतिया लोअर इस्कूल में पढ़त रहे आ कहत रहे अंकल माने चाचा, मामा, फूफा. उनका आपन दिन याद आ गइल. उहो त इहे पढ़ल रहले. जब ऊ पढ़त रहले त अंग्रेजी पढ़ल मास्टर के बड़ा रुतबा रहे. ऊ मैट्रिक पास रहे बाकी लोग मिडल पास.पूरा पढ़ीं…

– जयंती पांडेय जान जा राम चेला अबकि के चुनाव के अजबे हाल बा. नेताजी हार गइले लेकिन दुखी नइखन. काहे कि उनका दुख में शामिल होखे वाला केहु नइखे. सबलोग पार्टी के खुशी में शामिल बा. पार्टी जीत गइल ओह में नाच रहल बा. एगो नेताजी जीत गइले लेकिनपूरा पढ़ीं…

– जयंती पांडेय नेताजी काल्हु दुपहरिया में गावें अइले. चुनाव के मौसम बा ना त ऊ अइसन जरत दुपहरिया में एसी से निकले वाला जीव ना हउअन. काम रहे सब वरकरन के चुनाव के पाठ पढ़ावल. वइसे त ऊ पिछलको चुनाव में ई पठवा पढ़वले रहले लेकिन डर रहे किपूरा पढ़ीं…

– जयंती पांडेय बाबा लस्टमानंद आ रामचेला फगुआ में कोलकाता अइले. उहां मिडल क्लास में पढ़े वाला उनकर नाती जब पूछलस कि बाबा हो ‘रंग बरसे भीजे चूनर वाली..’ गीत के माने का होई. सांचो हो पहिले त बाबा कबीर कहत रहले ‘बरसे कमर भीजे पानी’ अब त भीजल चूरपूरा पढ़ीं…

– जयंती पांडेय ओह दिन गांव के बूढ़ नथुनी बाबा के देहांत हो गइल. इंडिया आ पाकिस्तान के क्रिकेट मैच रहे ओह दिन. ऊ का दो बीस-बीसा (20-20) कहाला, उहे मैचवा रहे. मुअले सांझ के. आ गांव के नौजवान दल गायब. खाली बूढ़ लोग ओहिजा आइल. बड़ा मुश्किल. आम केपूरा पढ़ीं…

– जयंती पांडेय रामचेला बड़ी परेशान रहलन. काहे कि उनकरा आफिस में ढेर लोग के परमोशन भइल बाकिर उनकर ना भइल रहे. अब इ बात के दुखड़ा उ केकरा से रोवस. बस मुंह लटकवले रहस. अब लस्टमानंद त घाघ. उ आपन चेला के दरद बुझ गइलन. एक दिन एकांता देखपूरा पढ़ीं…

– जयंती पांडेय परहेज के माने होला कि नुकसान करे वाला अउर जउन चीज बादी होखे तउना के सेवन ना कइल अउर सबूर राखल, दोष, पाप कइला अउर खराब आदत से बचल. एही के लोग परहेज कहेला आ जे नियम धरम से रहेला, परहेज करे वाला होला, ओकरा के लोगपूरा पढ़ीं…

– जयंती पांडेय जाड़ के दिन रामचेला आ बाबा लस्टमानंद बइठल कौड़ा तापत रहले. बात चलल देश के हाल पर आ चलत-चलत चलि आइल हमनी भारत के लोग का शौक पर. बाबा पूछले कि ‘जानऽ तारऽ, अपना देश के लोग के सबसे बड़हन शौख का ह ? केहु कुछ बतावल,पूरा पढ़ीं…

– जयंती पांडेय रामचेला बाबा लस्टमानंद से पूछले कि राजनीति में भ्रष्टाचार के अलावा आउर का होला? बाबा मुस्किअइले आ कहले भ्रष्टाचार त राजनीति के फल होला ओकरा में शामिल ना होला. राजनीति के आपन एगो संसार होला आ ओह में रहेला में इज्जत आ पांक. पांक आ इज्जत जब-जबपूरा पढ़ीं…