– जयंती पांडेय रोज रैली, प्रदर्शन, नारेबाजी से एकदम रीगल रामचेला कहले – बाबा आजुकाल ई नेतवन के का हो गईल बा कि रोज प्रदर्शन रोज बवाल. जेकरा देखऽ उहे झंडा टंगले चिचियात घूमऽता. बाबा लस्टमानंद मुस्किया के कहले, रामचेला, जान जा कि ई विरोध प्रदर्शन आ रैली के एगोपूरा पढ़ीं…

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– जयंती पांडेय बाबा लस्टमानंद सरकार के बयान से रिग के कहले, आजकल सब काम गिरहथे खातिर हो रहल बा. अब देखऽ ना रामचेला सरकारी कर्मचारी लोग के महंगाई भत्ता बढ़ल लेकिन ई सब गिरहथे के खातिर हो रहल बा. अब सेना में एक रैंक एक पेंशन के फैसला होपूरा पढ़ीं…

– जयंती पांडेय अभी अभी महात्मा गांधी के जनम दिन गुजर हऽ. राजघाट पर बड़े बड़े नेता लोग ना जाने कवन कवन किरिया खाइल लोग. एही में से एगो बड़हन नेता के जे रामराज पार्टी के रहे. उनका से भेंट भईल. ऊ लोग के पार्टी गांधी बाबा के नांव परपूरा पढ़ीं…

– जयंती पांडेय आज सबसे ज्यादा चर्चा दू बात के बा. पहिलका एफ डी आई आ दोसरका अण्णा चाचा के पार्टी में अलगा बिलगी. ई तऽ सबे जानत रहे कि करप्शन के ई मारामारी ना चली तबो करप्शन के नांव पर बड़ा हल्ला रहे. ई हल्ला उहे लोग मचवले रहेपूरा पढ़ीं…

– जयंती पांडेय हम भ्रष्टाचार के भविष्य के लेके निश्चिंत बानी. ई एकदम सत्य हऽ कि खाली हमनिए के देस में भ्रष्टाचार आ भ्रष्टाचरियन खातिर तमाम संभावना आ सुविधा बा. हमनिए के ई हुनर हऽ कि हमनी का कहीं भी, कबहुओं करप्शन के बुनियाद रख सकेनी सन. क्षेत्र चाहे राजनीतिपूरा पढ़ीं…

– जयंती पांडेय कोइला घोटाला पर बहस सुनि के बाबा लस्टमानंद कहले, एकदम आजिज आ गइल बानी, बिल्कुल जी बोर हो गइल बानी, कोइला से. लालूजी के खास भूतपूर्व मंत्री प्रेमचंद गुप्ता के बेटा ले गइले खान, डीएमके के मिनिस्टरो ले गइले. कांग्रेस वाला त लेइए गइल लोग, बीजेपीओ वालापूरा पढ़ीं…

– जयंती पांडेय हमनी के जीवन से कई गो बात सटल बा जेपर आदमी के आपन कवनो हक नइखे। जइसे आपन पड़ोसी, आपन माई बाप आ आपन नांव। ई बस हो जाला एकर चुनाव ना कइल जा सके। लेकिन आज के दुनिया में पहिलका दू गो बात त आपके अधिकारपूरा पढ़ीं…

– जयंती पांडेय संसद के बइठक के ले के भाजपा दस दिन ले उठक बइठक कइलस. इ हमनी के लोकतंत्र हऽ लेकिन करबऽ का, हमनी का आजाद बानी सन आ आजादी के तऽ इहे मजा हऽ , जवन में आवे करऽ. चाहे संसद मत चले दऽ चाहे रेल वइसे का.पूरा पढ़ीं…

– जयंती पांडेय जबसे बाबा लस्टमानंद सुनले कि सरकार गरीब लोग के एगो मोबाइल फोन फ्री दी तबसे बउरा गइल बाड़े. कई हाली रामचेला कहले कि ई मुफुत के लिहल आ भीखमंगी बराबर होला लेकिन बाबा बाड़े कि सुने के नईखन चाहत. उनकर कहल हऽ कि मुफ्त के माल मेंपूरा पढ़ीं…

– जयंती पांडेय गुरू लस्टमानंद मार कुर्ता धोती अपना बेग में से निकाल के बिगत रहले साफ करे के. अतने में राम चेला अइले. दंडवत क के पूछले का ह हो बाबा कई दिन से ना लउकलऽ. कहां चल गइल रहल ? बाबा कहले, दिल्ली गईल रहीं. राम चेला केपूरा पढ़ीं…

– जयंती पांडेय बाबा लस्टमानंद जिला मुख्यालय गइले. उहां अजब माहौल रहे. चारू ओर खुसी से अफसरान अमला मातल रहे. पते ना चले कि का भइल बा. एगो परिचित से पूछले त पता चलल कि ई समय पर बरखा ना भइला के खुसी ह. अब सब बात उनका समझ मेंपूरा पढ़ीं…