– जयंती पांडेय सब केह हाथ के संगे बा बाकिर हाथ भर फरका. शरद पवार भईया खिसियाइल बाड़े. उनका के देखि के बुझाला ना कि खिसियइबो करेले. हमशा खुशे लऊकेलें. लेकिन खिसिया गईल बाड़े. ऊ त अईसन जीव हउअन कि यूपीए के आठ बरिस में कबहुओं ना खिसिअइले. ओहु समयपूरा पढ़ीं…

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– जयंती पांडेय बाबा लस्टमानंद एकदम मूड में रहले. आज काल बड़हन नेता लोगन के धमकावे आ ऊहो अपना से छोटकन के धमकावे के मामला पर चर्चा में कहले, जान जा रामचेला कि धमकावे के आपन फायदा होला आ धमकियावे के अलग. जे धमकावे ला ऊ तऽ जान जा किपूरा पढ़ीं…

– जयंती पांडेय सबेरे सबेरे रामचेला बाबा लस्टमानंद के दुअरा अइले आ लगले गादे करे. बाबा अचकचा के उठले, का हो का अतना प्राण तेयगले बाड़ऽ? सब ठीक बा नऽ? का ठीक बा बाबा, तूं त भईंस बेचि के सुतल बाड़ऽ, देस दुनिया के कवनो फिकिर कहाँ बा. अरे भईलपूरा पढ़ीं…

– जयंती पांडेय उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अपना राज्य के विधायकन के एमएलए फंड से गाड़ी कीने के औडर दे देहलें त उनका ई औडर से विधायक लोग बड़ा खुस भइल लेकिन बाद में अनासे कहि दिहले कि औडर कैंसिल. अब ऊ लोग के आसा पर पानी पड़पूरा पढ़ीं…

– जयंती पांडेय एक दिन बाबा लस्टमानंद बड़ा दुखी हो के रामचेला से कहले, हो भाई जदि तोहरा थरिया में परल तरकारी ठीक ना बनल त तूं का अपना मेहरारू के गरियइबऽ कि उल्टा सीधा बोलबऽ? ना नु. लेकिन केहु सब्जी के भावना के खेयाल ना करे. ऊ त आपनपूरा पढ़ीं…

– जयंती पांडेय कई दिन से बाबा लस्टमानंद अपना संघतिया राम चेला से हरकल रहत रहले. अनमुन्हसारे रामचेला चलि आवस आ बाबा के घरे अखबार आते सवाचस कि का हो बाबा राष्ट्रपति चुनाव में का हो ता? एक दिन बाबा औंजिया पूछले कि आखिर तूं ई बतिया रोज काहे पूछेपूरा पढ़ीं…

– जयंती पांडेय आजुकाल रोज सरकार के ओर से एगो आश्वासन दिहल जाला – अगर कहीं गलती भइल होखी त ओकर जांच होई. जांच चलत रहेला, नतीजा कबहुओं सामने ना आवे. जेतना गलत काम होला सबके शुरुआत जांच से होला आ खत्म ई नतीजा से होला कि कवनो गलती नइखेपूरा पढ़ीं…

– जयंती पांडेय एक दिन एगो प्रोफेसर साहेब, उनकर नांव ह रवींद्र पाठक जी, बिहार के सिवान जिला से आ के लस्टमानंद से भेंट कइले. बाते बात में पुलिस पर चर्चा चलि गइल त पाठक जी बड़ा दुखी हो के बतवले ‘आजुओ काल पुलिस के बारे में लोग के अच्छापूरा पढ़ीं…

– जयंती पांडेय आजु काल्हु , जान जा ए रामचेला कि नेता लोगन के जबान बिछला जा तिया. कहले बा कि चाम के जीभ ह, बिछला जाले. लेकिन नेता लोगन के जीभ सबसे जियादा बिछलाले. खास क के जब चुनाव के पहिले वाला मौका होखो. अब देखऽ ना कि दूपूरा पढ़ीं…

– जयंती पांडेय ई त केहु विज्ञानीए बता सकेला कि तीनूं तिरलोक में आदमी के अलावा कवन प्राणी हंसेला. लेकिन ई त तय बा कि गदहा बिल्कुल ना हंसेला. बाबा लस्टमानंद के बात सुनि के राममचेला कहलें, ऊ जे गदहा कभी-कभी हंसत अइसन लागेला तवन? बाबा कहले दरअसल आदमी केपूरा पढ़ीं…

– जयंती पांडेय अबहीं दिन चढ़ल शुरूए भईल रहे आ घामो अब तपल शुरु हो गइल रहे कि रामचेला बाबा लस्टमानंद के मड़ई में अइलें. उनका कांखि में एगो अखबार दबाइल रहे. ऊ अखबार निकाल के बाबा के दिहले. बाबा पढ़ल शुरू कइलें. ओह में लिखल रहे कि सूतला मेंपूरा पढ़ीं…