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कहानी संग्रह ‘लाज लागेला’ क समीक्षा

– विजय शंकर पाण्डेय श्रीमती आशारानी लाल क कथा संग्रह ‘लाज लागेला’ पर कुछ लिखे में हमहीं के लाज लागत हौ. जइसे सूरज के दीया देखावे में लाज न लगै त देखे वाले ओके पागल जरूर कइहैं. इहै हमार हालत होई. तबो हम ढिठाई...

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‘खून भरी हमार मांग’ के सबले कमजोर पक्ष बा एकर निर्देशन

– संकेत बी॰ बेदर्दी हालही में रिलीज भइल भोजपुरी फिलिम ‘खून भरी हमार मांग’ के निर्देशन पक्ष एतना कमजोर बा कि दर्शक सिनेमाघर में ई कहला से नइखन चुकत कि केतना बेकार निर्देशन बा एह फिलिम के कि तनिको समझ में नइखे आवत. दर्शकन से...

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"फगुआ के पहरा" पर एक नजर

– मनोकामना सिंह ‘अजय’ आदरणीय डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल जी, सादर प्रणाम. अपने के भेजल “फगुआ के पहरा” सावन में भाई गंगा प्रसाद अरुण के मार्फत मिलल. राउर गजल के ई लाइन हमनी पर बिलकुल ठीक बइठत बा –...

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भोजपुरी गीत के भाव भंगिमा

– डा॰अशोक द्विवेदी कविता का बारे में साहित्य शास्त्र के आचार्य लोगन के कहनाम बा कि कविता शब्द-अर्थ के आपुसी तनाव, संगति आ सुघराई से भरल अभिव्यक्ति ह. कवि अपना संवेदना आ अनुभव के अपना कल्पना शक्ति से भाषा का जरिए कविता के...

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