पाँच दिन लगातार टटका खबर ना दिहल जा सकल काहे कि आसमान से बरसत आग लेखा गरमी हमरो के अपना चपेटा में ले लिहले रहल. एही बीच एगो कमी खलल कि अँजोरिया का लगे कवनो वैकल्पिक व्यवस्था नइखे जवना से कि एकर प्रकाशन अनवरत कइल जा सके. कई बेर कह चुकल बानी कि भोजपुरी वेबसाइट चलावल आर्थिक रुप से कबो फायदेमन्द नइखे. अँजोरियो अपना शौक का चलते प्रकाशित कइले जात बानी.

का रउरा में से कुछ लोग अइसन नइखे जे अँजोरिया के मोजूदा सम्पादकीय नीति में फेर बदल कइले बिना एकरा सम्पादन में सहयोग दे सके? आ कवनो आर्थिक लाभ के आकांक्षा बिना. अगर रउरा में से कुछ लोग सहयोग देबे खातिर आगे आवे के तइयार होखो त ओह लोग के बतौर सहसम्पादक जोड़े के विचार बा. अगर केहू एह वेबसाइट के आर्थिक रुप से सुदृढ़ करे लायक कवनो व्यावहारिक व्यावसायिक सुझाव दे सके त जरुर देव. जिनकर सुझाव पसन्द आई उनका के प्रबन्धक का रुप में जोड़ लिहल जाई. ओह हालत में होखे वाली आय के प्रबन्धक आ सहसम्पादकन का बीच बाँट दिहल जाई.

साथहीसाथ रउरा में जे भी समसामयिक मुद्दा पर भोजपुरी में लेख भा ब्लाग लिख सके ओहू लोग के स्वागत बा. जरुरत बा अँजोरिया के एक आदमी के बोझा से बदल के सौ के लाठी बना दिहल जाव. शायद तब अँजोरिया के मूल उद्देश्य के पूर्ति बेहतर ढंग से कइल जा सकी.

एह बात पर राउर का राय बा विस्तार से लिख भेजीं. बहस चलाईं. शायद कुछ काम के बात निकल आवे.

एही इन्तजार में,

राउर,
संपादक,
अँजोरिया.

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