डॉ अशोक द्विवेदी ‘कबीर कूता राम का/मुतिया मेरा नाउँ। गले राम की जेंवड़ी/जित खैंचे, तित जाउँ।।’ कबीर उत्तर भारत के अइसन फक्कड़ मौला सन्त रहलन, जे अपना सहज लोकचर्या आ ठेठ बोली-भाषा के कारन सबसे अलग पहिचान बनवलन। उनका कविता में ‘अनुभूत सत्य’ का प्रेम पगल भक्ति के अलावा अगरपूरा पढ़ीं…

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गंगा प्रसाद ‘अरुण’ जा हो निझाइल जवानी! एह भरल बसंत के भोरहरिया में इयादो आवे के रहले त रामेटहल काका आ कपार पर चकरघिन्नी खात उनकर कहटर पुरान! असल में अभी निनिआइले रहीं कि सुतले-सुतले सुरता पर चढ़ गइले भोजपुरी के अमर गायक खलील जी अपना पूरा लय-सुर में भोलानाथपूरा पढ़ीं…

जे भोजपुरी में, भोजपुरी खातिर, बिना लोभ-लालच आ मान-प्रतिष्ठा के परवाह कइले बरिसन से चुपचाप रचनात्मक काम कर रहल बा आ कइले जा रहल बा, ओके नजरअन्दाज कइ के, एक-दूसरा के टँगरी खींचे वाला ई कथित भोजपुरी-हित चिंतक मठाधीशे लोग बा। हमरा त चिंता होला कि भोजपुरी के कबो अगर मान्यता मिल गइल आ ओकरा नाँव पर पढ़े-पढ़ावे भा पुरस्कार-सम्मान के इन्तजाम होइयो गइल त ओकरा बाद के स्थिति केतना बिद्रूप आ भयंकर होई? तब त एक दोसरा क कपार फोरे में ना हाथ लउकी, ना ढेला।

हिन्दुवन के कमजोरी ह कि ऊ जीव हत्या पसन्द ना करसु. इहां ले कि जे मांसभक्षी होला उहो अपना सोझा काटल पसन्द ना करे. जे काटेला ऊ झटका में काटेला कि कटाएवाला के कम से कम कष्ट होखे. दुनिया के सगरी नीति नैतिकता पोसे पकावे वाला हिन्दू के इहो यादपूरा पढ़ीं…

वइसे त गोस्वामी तुलसीदास लिख गइल बानी कि समरथ के नहीं दोष गुसाईं बाकिर जमाना बदलल त कहाउतो बदलबे करी आ अब के कहाउत ई बा कि बरियार चोर सेन्हे पर बिरहा गावेला. ओकरा निकहा से मालूम बा कि ओकरा के दोषी बतावे के बेंवत केहू में नइखे. तबहियो ओकरापूरा पढ़ीं…

पहिला बेर देश के कवनो गोल हिन्दुवन का खिलाफ खुला लड़ाई के एलान क दिहलसि आ ई गोल ना त मुस्लिम लीग ह, ना ओवैसी के मजलिस. ई गोल ह अपना के जनेऊधारी बरहमन होखे के दावा करे वाला के गोल कांग्रेस. लोकसभा में कांग्रेस के नेता खडगे के कहनापूरा पढ़ीं…

बबुअवो कमाल के आदमी हवे. जबे लागेला कि अब ई सयान होखे लागल बा तबहिऐं कुछ ना कुछ अइसन बोल देला कि लोग माथा ठोक लेला कि हे भगवान, ई कहिया सयान होखी. आ जब लोग के ई हालत बा त ओकरा महतारी के पीड़ा सहजे समुझल जा सकेला. बेचारीपूरा पढ़ीं…

के जानत रहुवे कि बतंगड़ के 100वां कड़ी बाजपेयी जी के मातम मनावे का काम आई. अटल जी के लोग बेपनाह प्यार कइल, सम्मान कइल बाकिर बहुते कम लोग रहल जे उनुका के सही में समुझ सकल. हिन्दूवादियन खातिर ऊ सेकूलर रहलन आ सेकूलर जमात खातिर कम्यूनल. राहुल के कईपूरा पढ़ीं…

– आलोक पुराणिक ढेरे सनसनी बा. कवनो टीवी चैनल के भासा उधार ले लीं त ई कहल जा सकेला कि पूरा मुल्के में सनसनी बा. मुल्के काहे पूरा दुनिया में सनसनी बा. एगो टीवी चैनल एही मसला पर पूरा एक घंटा के रपट परोस दिहलसि कि – प्रियंका चोपड़ा अपनापूरा पढ़ीं…

पप्पू बनि के जीयल आसान ना होखे. ओकरा खातिर बहुते तेज दिमाग राखे के होला. अइसन अइसन बाति सोचे-कहे के पड़ेला जे दोसर केहू सपनो में ना सोच सके. बाकिर पप्पू के दुर्भाग्य कि ऊ इटालियन महतारी का पेट से बाकिर हिन्दुस्तान में जनमल. ओह घरी के कहो ओकरा कईपूरा पढ़ीं…

लरिकाईं में एगो कहानी सुनले रहीं कि बहेलियन का जाल में फँसे वाला चिरईयन के दशा देख दुखी भइल एगो संत चिरईयन के रटा दिहलें कि – शिकारी आएगा, जाल बिछाएगा, लोभ से उसमें फँसना नहीं. चिरई दिन दिन भर एह बात के माला जपल करऽ सँ आ दाना चुगतपूरा पढ़ीं…