सामयिकी : अपना भाषा-साहित्य के चिन्ता में उपजल क्षोभ

December 26, 2018 Editor 0

जे भोजपुरी में, भोजपुरी खातिर, बिना लोभ-लालच आ मान-प्रतिष्ठा के परवाह कइले बरिसन से चुपचाप रचनात्मक काम कर रहल बा आ कइले जा रहल बा, ओके नजरअन्दाज कइ के, एक-दूसरा के टँगरी खींचे वाला ई कथित भोजपुरी-हित चिंतक मठाधीशे लोग बा। हमरा त चिंता होला कि भोजपुरी के कबो अगर मान्यता मिल गइल आ ओकरा नाँव पर पढ़े-पढ़ावे भा पुरस्कार-सम्मान के इन्तजाम होइयो गइल त ओकरा बाद के स्थिति केतना बिद्रूप आ भयंकर होई? तब त एक दोसरा क कपार फोरे में ना हाथ लउकी, ना ढेला।

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अमला के माई : बतंगड़ – 101

November 2, 2018 Editor 0

बबुअवो कमाल के आदमी हवे. जबे लागेला कि अब ई सयान होखे लागल बा तबहिऐं कुछ ना कुछ अइसन बोल देला कि लोग माथा ठोक […]

सोफा पर पसरल मुख्यमंत्री – बतंगड़ – 91

June 24, 2018 nffsrn 0

ई देश तरह-तरह के मुख्यमंत्री देख चुकल बा. बाकिर दिल्ली के मुख्यमंत्री के जोड़ खोजल मुश्किल बा. बिहार के लबार मुख्यमंत्री रहल चाराचोर रुपिया जतना […]