किताबि आ पत्रिका के परिचय – 10

माया माहाठगिनि “माया माहाठगिनि” डॉ. गदाधर सिंह के भोजपुरी ललित निबंध संग्रह हटे, जवना के द्वितीय संस्करण के प्रकाशन सन् 2013 में निलय प्रकाशन, वीर कुँअर सिंह विश्वविद्यालय परिसर, आरा, भोजपुर (बिहार) से भइल बा. एकर कीमत 100 रुपया बाटे आ एह्में 120 गो पन्ना बा. एह ललित निबंध संग्रह में लेखक के 14 गो …

किताबि आ पत्रिका के परिचय – 9

मुट्ठी भर भोर ” मुट्ठी भर भोर ” डॉ. अरुणमोहन भारवि के भोजपुरी कहानी संकलन हटे, जवना के प्रकाशन सन् 2013 में अरुणोदय प्रकाशन, आर्य आवास, भारतीय स्टेट बैंक (मुख्य शाखा) के सामने, बक्सर- 802101 (बिहार) से भइल बा. एकर कीमत 300 रुपया बाटे आ 120 गो पन्ना बा. एह कहानी संकलन में 24 गो …

नीक-जबून-5   

डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल के डायरी रसियाव खाईं आ टन-टन काम करत रहीं आजु स्टाफ रूम में अपना गीत के एगो लाइन गुनगुनात रहीं- “ननदी का बोलिया में बने रसियाव रे. सरगो से नीमन बाटे सइँया के गाँव रे.“ साहा सर के जिग्यासा पर चर्चा शुरू हो गइल कि “रसियाव का हटे.” खीर के पुरान …

किताबि आ पत्रिका के परिचय – 8

मातृभाषाई अस्मिता बोध “मातृभाषाई अस्मिता बोध” डॉ. जयकांत सिंह के भोजपुरी मातृभाषा चिंतन पर एगो प्रबंधात्मक पुस्तक बिया, जवना के प्रकाशन सन् 2016 में राजर्षि प्रकाशन, मुजफ्फरपुर – 842001 (बिहार) से भइल बा. एकर कीमत 51 रुपया बाटे.   ई किताब तीन भाग में बिया। 1.भूमिका 2.मातृभाषा शिक्षा के औचित्य 3.मातृभाषाई अस्मिता बोध   लेखक …

बाप के नाम साग-पात, बेटा के नाम परोरा : बाति के बतंगड़ – 21

– ओ. पी. सिंह पिछला हफ्ता लिखले रहीं कि नाम में का धइल बा आ एह हफ्ता फेरु नामे के चरचा ले के बइठ गइनी. बाकि करीं त का ? कुछ दिन पहिले ले नोटबन्दी के चरचा रहुवे. कहीं से शुरू करीं बात घुमा फिरा के नोटबन्दी प आ जात रहुवे. आ अब बाप-बेटा, चाचा-भतीजा …

नाम में का धइल बा : बाति के बतंगड़ – 20

– ओ. पी. सिंह नाम में का धइल बा. नाम कुछऊओ होखे, काम बढ़िया रहल त नाम होईये जाई आ काम खराब हो गइल त सगरी बनलो नाम खराब हो जाए से बचावल ना जा सकी. अलग बाति बा कि कई बेर कुछ लोग के लागेला नेकनेम ना त बदनामे सही, नमवा त हो जाई. …

कहि देहब ए राजा राति वाली बतिया : बाति के बतंगड़ – 19

– ओ. पी. सिंह महफिल अपना शबाब पर रहुवे. नाच मण्डली के मलकिनी साज वालन का पीछे बइठल नचनियन के जोश बढ़ावत रहली. मसनद के सहारा लिहले बाबू साहब नाच के आनन्द लेत रहलन. नाचत लउण्डा गाना उठावे आ कुछ कुछ देर पर बाबू साहब के धेयान खींचे के कोशिश करत रहुवे. बाकि बाबू साहब …

कुमरपत – देश के समस्या के सोर : बाति के बतंगड़ – 18

– ओ. पी. सिंह अब बतंगड़ ले के आगा बढ़ीं ओह से पहिले जरुरी लागत बा कि कुछ बतकुच्चन करत चलीं। काहे कि हो सकेला कुछ लोग कुमरपत आ सोर के सही मतलब ना समुझ पावे। आ जब सोरे झुरा जाई त पतई कइसे निकली ? सोर आ शोर जइसन शब्दने का चलते भोजपुरी में …

गइले सुरुज, हाय छोड़ि मैदनवाँ

– हीरा लाल ‘हीरा’ जड़वा लपकि के धरेला गरदनवाँ देंहियाँ के सुई अस छेदेला पवनवा ! नस -नस लोहुवा जमावे सितलहरी सुन्न होला हाथ गोड़, ओढ़नो का भितरी थर- थर काँपs ताटे सगरे बदनवाँ ! देहिया के सूई अस छेदेला पवनवा ! धइलस उखिया के, अझुरा के लासा चीनी मिल-मलिकन क होखेला तमासा पालि-पोसि उखिया …