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भोजपुरी साहित्य

जाने कवन राहे अइहें

– प्रिन्स रितुराज छन छन छनके आहट सुन के मन गचके जाने कवन राहे अइहें इहे सोच के मन खटके. आदत...

फहरावs तिरंगा

फहरावs फहरावs तिरंगा आसमान में फहरावs । केसरिया के अमर सनेसा शान्ति रहो सुख चैन रहो तप के धनी रहो...

सावन -सिसक गइल बा

– डॉ राधेश्याम केसरी ढहल दलानी अब त सउँसे, पुरवइया क झांटा मारे, सनसनात ठंढा झोका से, देहिया...

करमगति

(लोककथा) शिव जी का सङे पार्वती जी आकासी राहे कहीं चलल जात रही कि उनकर नजर नीचे एगो गरीब परिवार पर...

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सतमेझरा

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संपादक के पसन्द

प्रगतिशीलता के नाम पर

– डॉ ब्रजभूषण मिश्र भाषा सब अइसन भोजपुरी साहित्य में बेसी कविते लिखल जा रहल बा. दोसर-दोसर...

भारतीय संस्कृति के संवाहक रक्षाबंधन के अस्तित्व संकट

– डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल सावन के पुरनवासी के इंतजार हर घर के होला काहेंकि एह दिन देश भर में राखी के तेवहार मनावल जाला. राखी माने रक्षाबंधन. ई हिंदू धर्म के लोकप्रियता के कमाल हटे कि रक्षाबंधन के तेवहार के विस्तार हिंदू...

भोजपुरी साहित्य के धरोहर हऽ – रमबोला

– हरेन्द्र हिमकर धरती के रग-रग में भइल राग अदिमी -अदिमी हो गइल नाग डंसलनि समाज के पोर-पोर देहिया-देहिया में लगल आग। अंगे-अंगे धहकल धिधोर धरती लिहली अॅंचरा बिटोर तब धू-धू-धू सब ओर मचल रीसे लागल अॅंखिया करोड़। राजा से रूस गइल...

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भोजपुरी सरोकार

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पुस्तक चर्चा

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