कृष्णानन्द कृष्ण रिटायर्ड़ भइला का बादो दीनदयाल जी के दिनचर्या में कवनो बदलाव ना आइल रहे. उहे पूजा-पाठ, सध्या-वन्दन आ खाली समय में कवनो ना कवनो विद्यार्शी के विद्यादान. उनकर इ मान्यता रहे कि दुनिया में सबसे उत्तम दान विद्यादान होला. आदमी के जीवन में इहे एगो चीज बा जवनपूरा पढ़ीं…

Advertisements

देरी से मिलल खबर आइल बा कि भोजपुरी के प्रतिष्ठित कथाकार-कवि कृष्णानंद कृष्ण जी अब हमनी का बीच ना रहलीं. उहाँके निधन तीन दिन पहिले मंगल का दिने बंगलौर में हो गइल. ई खबर डॉ सतीशराज पुष्करणा जी से वरिष्ठ साहित्यकार भगवती प्रसाद द्विवेदी जी के मीलल आ उहाँ सेपूरा पढ़ीं…

एकरा पहिले कि रउरा आगे पढीं साफ क दीहल जरुरी बा कि ई उलटबाँसि ह, एकरा के सीरियसली लिहला के जरुरत नइखे. देश के सिकूलर, लिबरल, पत्तलकार, विपक्ष सभे एह बाति के मानी कि संघ के योजना बहुते दूर से निशाना साधेला. जवन संगठन एक दिन में पूरा देश मेंपूरा पढ़ीं…

डॉ. जयकान्त सिंह ‘जय’ हमरा समझ से संस्कृत के देवभाषा एह से कहल गइल कि एकरा में रचल प्राय: हर कविता चाहे श्लोक समस्त सृष्टि खातिर जीवन मंत्र के काम करेला. नमूना के रूप में एगो श्लोक देखीं – ” अमन्त्रमक्षरं नास्ति, नास्ति मूलं वनौषधम्. अयोग्यो पुरुषो नास्ति, योजकस्त्र दुर्लभ:.पूरा पढ़ीं…

भोजपुरी साहित्य के गौरव आ एगो मजबूत पाया जगन्नाथ जी काल्हु शनिचर 14 मार्च 2020 के साँझि खा साढ़े चार बजे पटना के अपना साधनापुरी निवास पर आपन आँखि मूदि लिहलीं. भोजपुरी गजल में जगन्नाथ जी के बड़हन योगदान का चलते उनुका के भोजपुरी के गालिब नाँव से जानल जाएपूरा पढ़ीं…

कुमार अभिनीत ‘भोजपुरी संगम’ के 121वीं ‘बइठकी’ अतवार का दिने गोरखपुर में तुर्कमानपुर का लगे साहित्यकार डॉ. रवीन्द्र श्रीवास्तव ‘जुगानी’ जी के घरे भइल. एह ‘बइठकी’ के पहिलका दौर में डॉ. फूलचन्द प्रसाद गुप्त आपन लिखल भोजपुरी कहानी पाठ कइनी. एह कहानी के समीक्षा करत प्रो. आर डी राय कहलेंपूरा पढ़ीं…

आजु ढेर दिन बाद अपना भोजपुरी अन्तरताना अँजोरिया पर आवे के मौका मिलल त कुछ खुशी मिलल. बाकिर साथही अफसोसो भइल कि भोजपुरी साहित्य के थाती के एगो बड़हन हिस्सा अपना अँचरा में समेटले आ भोजपुरी में पहिलका अन्तरताना होखे के सौभाग्य पवले अँजोरिया के हालत आह बुढ़िया माई जइसनपूरा पढ़ीं…

डॉ अशोक द्विवेदी एगो जमाना रहे कि ‘पाती’ (चिट्ठी) शुभ-अशुभ, सुख-दुख का सनेस के सबसे बड़ माध्यम रहे। बैरन, पोस्टकार्ड, अन्तर्देशी आ लिफाफा में लोग नेह-छोह, प्रेम-विरह, चिन्ता-फिकिर, दशा-दिशा आ परिस्थिति-परिवेश पर अपना हिरदया के उद्गार लिखि के भेजे । कबो-कबो त ‘पाती’ जेतना लिखनिहार का लोर से ना भींजे,पूरा पढ़ीं…

रामरक्षा मिश्र विमल भोजपुरी दू डेग आगे त हिंदी दू डेग पाछे हिंदी के कुछ तथाकथित विद्वान एह घरी भोजपुरी पर आपन-आपन ब्रह्मास्त्र चलावे में लागल बा लोग. ऊहन लोग में ई डर समा गइल बा कि भोजपुरी के जहाँ संविधान का आठवीं सूची में जगह मिलल कि हिंदी सतनासपूरा पढ़ीं…

नई दिल्ली में साहित्य अकादेमी का सभागार रवीन्द्र भवन में भोजपुरी के मशहूर लिखनिहार डॉ अशोक द्विवेदी के लिखल आलोचना के किताब के विमोचन पुरनिया लिखनिहार आ साहित्य अकादेमी के अध्यक्ष रह चुकल आचार्य विश्वनाथ तिवारी जी का हाथे कइल गइल. एह मौका पर भइल बतकही में मशहूर कथाकारनी डॉपूरा पढ़ीं…

भोजपुरी के मशहूर आ प्रतिष्ठित लिखनिहार डॉ अशोक द्विवेदी जी के लिखल किताब “भोजपुरी रचना आ आलोचना” के विमोचन 29 अक्टूबर 2019, मंगल का दिने दिल्ली में साहित्य अकादेमी के सभागार में होखे जा रहल बा. फिरोजशाह मार्ग पर बनल रवीन्द्र भवन के एह सभागार के तीसरा माला पर मौजूदपूरा पढ़ीं…