Category: भाषा

भोजपुरी भाषा के सरकारी उपेक्षा आ अन्याय का खिलाफ भोजपुरियन के आवाज

हिन्दी भाषा परिवार में बड़की बहिन होखला का बावजूद भोजपुरी भाषा के जवन सरकारी उपेक्षा हो रहल बा ओह अन्याय का खिलाफ रहि रहि के भोजपुरियन के शिकायत भरल आवाज…

बतरस आ पाती

अनिल कुमार राय ‘आंजनेय’ भोजपुरी अइसन भाषा ह, जवना पर केहू गुमान करि सकेला. एह भाषा के जेही पढ़ल, जेही सुनल, जेही गुनल ऊहे अगराइल, ऊहे धधाइल, ऊहे सराहल, ऊहे…

सँझवत के नयका अंक

भाषा, साहित्य, संस्कृति अऊर शोध के भोजपुरी त्रैमासिक पत्रिका सँझवत के नयका अंक पढ़े ला ओकर पीडीएफ फाइल डाउनलोड क के पढ़ लीं.  86 total views,  1 views today

भोजपुरी साहित्य के समृद्धि में विमल के डायरी ‘नीक-जबून’

डॉ अर्जुन तिवारी न समझने की ये बातें हैं न समझाने कीजिंदगी उचटी हुई नींद है दीवाने की. फिराक गोरखपुरी दुख-सुख, हर्ष-विषाद, आशा-निराशा, हानि-लाभ, जीवन-मरण, यश-अपयश के चलते हमनी के…

पढ़े-लिखे वाला पाठक, पठनीयता आ “पाती” – हमार पन्ना

डॉ अशोक द्विवेदी एगो जमाना रहे कि ‘पाती’ (चिट्ठी) शुभ-अशुभ, सुख-दुख का सनेस के सबसे बड़ माध्यम रहे। बैरन, पोस्टकार्ड, अन्तर्देशी आ लिफाफा में लोग नेह-छोह, प्रेम-विरह, चिन्ता-फिकिर, दशा-दिशा आ…

भोजपुरी के गँवारू भाषा जनि बनाईं (सँझवत-2 के संपादकीय)

रामरक्षा मिश्र विमल भोजपुरी दू डेग आगे त हिंदी दू डेग पाछे हिंदी के कुछ तथाकथित विद्वान एह घरी भोजपुरी पर आपन-आपन ब्रह्मास्त्र चलावे में लागल बा लोग. ऊहन लोग…

तबे स्वस्थ आलोचना के राहि विकसित होई

दू दिन पहिले विमल जी के पत्रिका सँझवत के जानकारी आ सामग्री मिलल. एने कई एक महीना से हम थाकल महसूसत बानी जवना चलते अब अँजोरिया भा एकरा दोसरा साईटन…

बोले-बतियावे से आगा / पढ़े-पढ़ावे के जरूरत !

– अशोक द्विवेदी लोकभाषा भोजपुरी में अभिव्यक्ति के पुरनका रूप, अउर भाषा सब नियर भले वाचिक (कहे-सुने वाला) रहे बाकिर जब ए भाषा में लिखे-पढ़े का साथ साहित्यो रचाये लागल…

रचनात्मक आन्दोलन के लौ भोजपुरी भासा के हर दौर में बरल बा

– सौरभ पाण्डेय भोजपुरी के भासाई तागत भर ना, बलुक एकर आजु ले बनल रहला के तागत प केहू निकहे से सोचे लागो आ अंदाजे लागो, त ऊ एह बात…

हिन्दी के ‘खाता’ आ हिन्दी के ‘त्राता’ से रार पर मनुहार

– डॉ प्रकाश उदय भइया हो, (पाती के संपादक) जतने मयगर तूँ भाई, संपादक तूँ ओतने कसाई। लिखे खातिर तहरा दिकदिकवला के मारे असकत से हमार मुहब्बत बेर-बेर बीचे में…

साँच उघारल जरूरी बा !

– डॉ अशोक द्विवेदी हम भोजपुरी धरती क सन्तान, ओकरे धूरि-माटी, हवा-बतास में अँखफोर भइनी। हमार बचपन आ किशोर वय ओकरे सानी-पानी आ सरेहि में गुजरल । भोजपुरी बोली-बानी से…