दू दिन पहिले विमल जी के पत्रिका सँझवत के जानकारी आ सामग्री मिलल. एने कई एक महीना से हम थाकल महसूसत बानी जवना चलते अब अँजोरिया भा एकरा दोसरा साईटन पर नया सामग्री नइखीं दे पावत. थाकल मन एहू चलते बा कि भोजपुरी में लंगड़ी गईया के अलगे बथान केपूरा पढ़ीं…

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– अशोक द्विवेदी लोकभाषा भोजपुरी में अभिव्यक्ति के पुरनका रूप, अउर भाषा सब नियर भले वाचिक (कहे-सुने वाला) रहे बाकिर जब ए भाषा में लिखे-पढ़े का साथ साहित्यो रचाये लागल तब एह भाषा के साहित्य पढ़े वालन क संख्या ओह हिसाब से ना बढ़ल, जवना हिसाब से एकर बोले-बतियावे वालनपूरा पढ़ीं…

– सौरभ पाण्डेय भोजपुरी के भासाई तागत भर ना, बलुक एकर आजु ले बनल रहला के तागत प केहू निकहे से सोचे लागो आ अंदाजे लागो, त ऊ एह बात प ढेर अचकचाई जे ई भासा कतना काबिल, आ कतना लोचगर भासा हऽ ! भासा के तौर प भोजपुरी लोचगरपूरा पढ़ीं…

– डॉ प्रकाश उदय भइया हो, (पाती के संपादक) जतने मयगर तूँ भाई, संपादक तूँ ओतने कसाई। लिखे खातिर तहरा दिकदिकवला के मारे असकत से हमार मुहब्बत बेर-बेर बीचे में थउस जाला, बाकिर तवना खातिर तहरा मने ना कवनो मोह ना माया। के जाने कवन कुमुर्खी तहरा घेरले बा किपूरा पढ़ीं…

– डॉ अशोक द्विवेदी हम भोजपुरी धरती क सन्तान, ओकरे धूरि-माटी, हवा-बतास में अँखफोर भइनी। हमार बचपन आ किशोर वय ओकरे सानी-पानी आ सरेहि में गुजरल । भोजपुरी बोली-बानी से हमरा भाषा के संस्कार मिलल, हँसल-बोलल आ रोवल-गावल आइल। ऊ समझ आ दीठि मिलल, जवना से हम अपना गँवई लोकपूरा पढ़ीं…

– डा0 प्रकाश उदय केहू दिवंगत हो जाला त आमतौर पर कहल जाला कि भगवान उनुका आत्मा के शांति देसु। हमार एगो कवि-मित्र कहेले कि बाकी लोग के त पता ना, बाकिर कवनो रचनाकार खातिर अइसन बात ना कहे के चाहीं। शान्त आत्मा से कवनो रचना त हो ना पाईपूरा पढ़ीं…

– डॉ अशोक द्विवेदी सोशल मीडिया का एह जमाना में वाट्स ऐप,फेसबुक पर, नोकरी-पेशा आ स्वरोजगार में लागल, पढ़ल – लिखल लोग अभिव्यक्ति के माध्यम का रूप में मातृभाषा के अपनवले बा। ऊ झिझक, ऊ संकोच हट गइल बा जवन भाषाई-इन्फिरियरिटी का कारन बनल लागत रहे। मध्यवर्गी, निम्न मध्यवर्गी परिवारपूरा पढ़ीं…

– डॉ अशोक द्विवेदी कविता के बारे में साहित्य शास्त्र के आचार्य लोगन के कहनाम बा कि कविता शब्द-अर्थ के आपुसी तनाव, संगति आ सुघराई से भरल अभिव्यक्ति हऽ। कवि अपना संवेदना आ अनुभव के अपना कल्पना-शक्ति से भाषा का जरिये कविता के रूप देला। कवनो भाषा आ ओकरा काव्य-रूपनपूरा पढ़ीं…

– डॉ ब्रजभूषण मिश्र भाषा सब अइसन भोजपुरी साहित्य में बेसी कविते लिखल जा रहल बा. दोसर-दोसर विधा में लिखे वाला लोग में शायदे केहू अइसन होई, जे कविता ना लिखत होई. एही से कविता के जरिये भोजपुरी में साहित्य लेखन के दशा-दिशा, प्रवृति-प्रकृति के जानल-समझल जा सकत बा. साहित्यपूरा पढ़ीं…

भोजपुरी भाषा के मान्यता ला आंदोलन चलावत “भोजपुरी जन जागरण अभियान” रउआ सभे से निहोरा आ निवेदन कर रहल बा कि भोजपुरी भाषा के मान सम्मान बचा के राखे खातिर दिल्ली में महाधरना 21 फरवरी 2017 के होखे जा रहल बा. एह धरना में भोजपुरिया भाई बहिन सभे के अधिकापूरा पढ़ीं…

सरकार के उदासीन रवैया के कारण…पाँचवा धरना प्रदर्शन दिल्ली के जंतर मंतर पर 15 नवम्बर, 2016 दिन मंगलवार के। भोजपुरी के संवैधानिक मान्यता आ भोजपुरी के आठवीं अनुसूची में शामिल करावे खातिर सभे भोजपुरिया,भोजपुरी संस्थान, पत्रकार बंधु, रंगकर्मी,साहित्यकार,भोजपुरी सेवी, कलाकार, राजनितिक दल के प्रतिनिधि से निहोरा बा कि अपना भोजपुरीपूरा पढ़ीं…