पहिला नजर में दुनु में कवनो बाति एक जइसन ना लागी बाकिर आजु जब सुर-संग्राम देखत रहीं त बार-बार एके बतिया धेयान में आवत रहुवे – टटका खबर. दुनिया भर से रोज हजारन खबर अलगा-अलगा अखबारन में छपेला. एकही खबर अलगा-अलगा अखबार में अलगा-अलगा ढंग से, अलगा-अलगा प्रमुखता से दिहल रहेला आ शायद एही चलते अलगा-अलगा अखबार जिन्दो रहेले. कवनो आगा बढ़ेला त कवनो पिछड़ल चलि जाला.

रउरा सोचत होखब कि ई हँसुआ का बिआह में खुरपी के गीत काहे गावल जा रहल बा ? बा कारण. हम सुर-संग्राम के शो में देखनी कि जवना प्रतिभागी के चुन लिहल जात रहुवे से त निर्णायक लोग के गोड़ छु लेत रहुवे बाकिर जिनका के छाँट दिहल जात रहुवे ऊ निर्णायक लोग का फैसला पर सवाल करे लागत रहले. बहुतेरे प्रतिभागी त जरुरे बहिर रहल होखिहें जिनका आपन गवनई सुनाते ना होखी कि ऊ कतना बेसुरा गावेले तबे ऊ निर्णायकन के निर्णय पर सवाल खड़ा कर देत रहले. कबो-कबो अइसनो भइल जब चुनाइल आ छँटाइल प्रतिभागियन में को बड़ छोट कहत अपराधू जइसन हालात बन जात रहुवे. लेकिन जगहा सीमित बा, बारहे लोग के चुने के रहुवे आ प्रतिभागी बेसी रहले. अगर केहू ना चुनाइल त ओकर ई मतलब कबो ना रहत रहे कि ऊ खराब गवले, बाति ई रहुवे कि सामने वाला बढ़िया गवलसि ! एके गायक-गायिका कबो-कबो बहुत बढ़िया गा देले आ कबो-कबो बहुते खराब. ठीक ओही तरह निर्णायको के निर्णय कबो-कबो सटीक रहेला त कबो-कबो ओकरो में दोष देखल जा सकेला. बहुत कुछ समय परिस्थिति आ मानसिक स्थिति पर निर्भर करेला.

टटका खबर में हमार कोशिश रहेला कि दस गो खास खबर चुन के अपना पाठकन का सोझा परोस दीं. अँजोरिया समाचार पत्र त ह ना. सगरी समाचार दोसरा माध्यम से बटोरिले. हँ ओकरा के पेश करे के अन्दाज, ओकरा पर भइल टिप्पणी टटका खबर के हमरा ब्लाग का तरह जरुर बना देले जवना से रउरा हमरा विचार से, रुझान से परिचित हो सकीले. टटका खबर पेश करे के मकसद अपरोक्ष रुप से इहो रहेला कि पाठक-पाठिका सामयिक संदर्भ में भोजपुरी के रसपान कर सकसु. कुछ ठेठ भोजपुरिया शब्द, कुछ ठेठ भोजपुरिया मुहावरा से परिचित करावे के एगो माध्यमो हवे टटका खबर. अइसनका बात ना ह कि उहे दस गो खबर सगरी खबरन के प्रतिनिधित्व करत बा. बाकियो खबर ओतने महत्व वाली हो सकेली. ठीक ओही तरह सुरसंग्राम में चुना गइल प्रतिभागिये बढ़िया गायक-गायिका हउवें ई बात बतावल केहू के मकसद ना रहे. मकसद ई होला कि ओह प्रतिभागियन का बहाने गाँव-देहात में छिपल प्रतिभा के प्रोत्साहित कइल जाव, ओह लोग के गीत-गवनई के एगो कैरियर का रुप में अपनावे के विकल्प दिहल जाव. जे छँटा गइल ओकरा समुझे के चाहीं कि ओकरा में ओह दिन कुछ कमी रह गइल जवना के दूर करे के कोशिश करे के चाहीं. अपना के रगड़े माँजे के चाहीं कि ऊ अउरी चमक के सामने आ सको.

हार के सलीका से ग्रहण करे वाला आदमिये जीत के सही हकदार हो सकेला. जे हार पर झुंझुआ गइल, निर्णायक पर सवाल उठावल शुरु कर दिहलसि ओकरा आगा बढ़े के संभावना ओतने कम होत जाई. जे चुना गइल उहो अगिला एपिसोड में हार सकेला, छँटाए वाला बा. हर दिन हर मौका के नया चुनौती का तरह लेबे के होखेला. आ कवनो अवसर आखिरी ना होला. जिनिगी में बहुतेरे अवसर मिलेला अगर आदमी ओकरा के पहिचाने के ताकत राखत होखे. कई बेर हार बतावेला कि ई दरवाजा बन्द बा, दोसर कवनो खिड़की खोले के मौका देखीं. दोसर कवनो क्षेत्र में आपन प्रतिभा निखारीं. ग्रामोफोन के टूटल ट्रैक का तरह एके जगहा सूई अटका के मत राख दीं.

राउर,
संपादक, अँजोरिया

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