देर से मिलल खबर का मुताबिक भोजपुरी के एगो महान साहित्यकार आ “किरण बावनी” के रचयिता गणेश दत्त किरण जी के पिछला पाँच सितम्बर के बक्सर के सोहनीपट्टी मुहल्ला में उनुका पैतृक निवास पर निधन हो गइल. किरण जी के
कलम साहित्य के हर विधा पर जम के चलल आ अपना ओजस्वी स्वर का चलते उहाँ का
हर सम्मेलन में समां बाँध देत रहीं.

किरण जी का निधन पर प्रसिद्ध साहित्यकार श्री रामेश्वर सिन्हा “पीयूष”, डॉ. गोरख प्रसाद “मस्ताना” आ डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल आपन शोक संवेदना व्यक्त करत कहले बा लोग कि किरण जी के निधन से भोजपुरी साहित्य के अपूरनीय क्षति भइल बा. विमल जी बतवलीं कि किरन जी अपना हर काम के एगो चुनौती का रूप में लेत रहलीं हा. ओज खातिर उहाँका प्रसिद्ध जरूर रहलीं हा बाकिर श्रृंगार,हास्य आदि पर भी उहाँ के लेखनी अबाध गति से चलल बिया.

उहाँ के गीतन के कुछ पंक्ति अबहिंयो बिसरेली सऽ ना-
“छनही में रूसा फूली छनही में यारी,
हाय राम अइसना रहन के कहीं का ?”

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