बिहार के गया जिला के निवासी सुदीप पाण्डेय के फिल्मी कैरियर भोजपुरिया भईया से शुरु भइल रहे जवना के हैरी फर्नाण्डीज निर्देशित कइले रहले. सुदीप पाण्डेय मानेले कि संघर्ष का दौरान बहुत कुछ अइसन बा जवना से दोसरा लोग के प्रोत्साहन मिल सकेला बाकिर ऊ एह बारे में बात करल ना चाहसु. कहेले कि ऊ दिन भुलाईये दिहल नीमन होई. बढ़िया काम कइला का बावजूद उद्योग में कवनो हवा ना खड़ा कर पवला खातिर सुदीप के कहना बा कि ऊ थियेटर कलाकार हउवन आ अपना तरफ आइल हर काम ना सकार सकस. उनका अपने शर्त पर काम कइल नीक लागेला से स्वाभाविक बा कि वइसनका काम बहुत कमे मिली.

सुदीप पाण्डेय के इहो नइखे मालूम कि कवना कारण से उनकर अधिका फिलिमन में डबल रोल बा. इहाँ तक कि उनुकर पहिलको फिलिम में डबले रोल रहुवे. सुदीप कहेले कि एकर बेहतर जबाब निर्देशके लोग दे पाई. हालही में रिलीज फिल्म मि॰ तांगावाला में फेर सुदीप के डबर रोल बा आ आवे वाली फिलिम कसम तिरंगा के में त ऊ एके साथ दस किरदार करत लउकीहे.

भोजपुरी फिल्मोद्योग का बारे में बतियावत सुदीप कहेले कि भोजपुरी सिनेमा के सबले बड़ विडम्बना इहे बा कि अधिकतर फिल्म परिवारन के देखे लायक बनावल जाले जबकि परिवार मुश्किले से थियेटर ले चहुँपेले. दोसरे भोजपुरी सिनेमा में स्टार सिस्टम बन गइल बा जवन एकर विकास के राह रोकले बा. बाकिर एकर जिम्मेदारी ऊ निर्देशक आ निर्माता लोगन पर डालेले जे नयका अभिनेता के मौका देबे से हिचकेले. फिल्म के सही वितरणो एगो बड़हन समस्या बा जवना खातिर निर्माता आ वितरक लोग के मिल बइठ के एह समस्या के समाधान खोजे के पड़ी.

अपना माता पिता के बेहद सम्मान देबे वाला सुदीप पाण्डेय के शौक बा जिम में कसरत कइल आ खाली समय में दोस्तन का साथे गप्पबाजी कइल. साथही मौका मिले त राजनीति का मैदानो में उतरे के चहीहे सुदीप. उनुकर कहना बा कि देश समाज खातिर कुछ कइल चाहत होखी त एहले बढ़िया दोसर कवनो मंच ना हो सके.


(स्रोत – संजय भूषण पटियाला)

Advertisements