AnandBihariYadavजवान होखत सिनेमा भोजपुरी में अब समझदारो लोग के आगम होखे लागल बा. वइसन लोग के जे भोजपुरी फिलिमन के दशा-दुदर्शा लेके चिंतित होखसु आ सुधार ला गंभीर. आनंद बिहारी यादव अइसने समर्पित शख्स हउवें. भोजपुरी माटी आ भाषा से इनकर लगाव त सभे जानेला बाकिर सी.सी.एल क्रिकेट टुर्नामेंट में अगर आनंद बिहारी यादव के योगदान ना होखीत त भोजपुरिया स्टार खेले खातिर तरस जइतें. सी.सी.एल खातिर जरुरी धन के प्रबंध अगर आनंद बिहारी यादव ना करीतें त बैट-बॉल धइले रह जाइत. एही भोजपुरी पूत आनंद बिहारी यादव से भइल बातचीत के कुछ अंश एहिजा परोसात बा :-

सी.सी.एल से खेले वाला हर कलाकार राउर रहल रउरा ना रहतीं त टूर्नामेंट में शामिल होखल संभव ना रहल.
उ त हमार फर्ज रहे, भोजपुरी माटी के पूत हईं आ अपना माटी, अपना महतारी के अपमान केहु कइसे सह सकेला. हम उहे कइनी जवन एगो लायक बेटा के कइल चाही. सी.सी.एल में हमनी के भोजपुरी कलाकार ना खेलतें त हमनी के कतना खराब लागीत.

भोजपुरी कलाकारन के सहयोग कइसन रहल?
एह दिशाईं मनोज तिवारी के सहयोग हमेशा याद रही. उ एह टूर्नामेंट ला एको पइसा ना मँगलन. ऊ महान कलाकारे ना महान आदमीओ हउवन.

रउरा त भोजपुरी फिलिमो बनावल शुरू कइले बानी. का नाम ह ओह फिलिम के ?
एगो ना दू गो फिलिम बनावत बानी. पहिलका के गाना के रिकार्डिंग पूरा हो गइल बा आ ओकर नाम ह “धारा 144” आ दुसरकी फिलिम के नाम ह – ’भोजपुरी दबंग’.

फिलिमन से नाता बस निर्माते के रही कि कुछ अउरीओ करब ?
श्रीमान हम एक्टिंगो करत बानी. भीतर से हम अभिनेता हईं, उपर से समाज सेवी. भीतर के एक्टर हमरा के सूते ना देव. एह से दोसर के तकलीफ समुझत अपनो दिल के हाल सुन लीहिलें.

भोजपुरी सिनेमा खातिर अउर का करेवाला बानी ?
एगो भोजपुरी अवार्ड करे के विचार बा जवना में भोजपुरी भाषा आ फिलिमन का विकास में लागल लोग के सम्मान कइल जाई.

लेकिन, जे लोग भोजपुरी फिलिमन के गंदा कइले बा, ओह लोग का बारे में का सोचत बानी ?
तलाब के सगरी मछरी गंदा ना होखऽ सँ. जे सही बा ओह लोग के पहिचाने ला, ओह लोग के माने ला त अवार्ड करे के सोचत बानी.

भोजपुरी फिलिमन के सही विकास काहे नइखे हो पावत ?
एह उद्योग में ढेरहन कलाकार बाड़ें, मेहनती लोग बाड़ें बाकिर अफसोस कि इंडस्ट्री कुछ लोग का गिरफ्त में अझुरा के रह गइल बा लोग करोड़ो कमात बा बाकिर ओकर चउथइओ खरच करे में ना-नुकूर करेला. फेर कइसे विकास होखी ? भोजपुरी के ऊ लोग को दूहे वाली कामधेनू समुझ लेले बा, आपन भाषा भा माई-मौसी ना.

सिनेमा भोजपुरी के भविष्य कइसन लागत बा ?
देखीं, भविष्य त बढ़िए बा. जवना भाषा के करोड़ो लोग जानत-बोलत होखे ओकर भविष्य त कबो खराब ना हो सके. जरूरत बा, तनिक अपनन से, अपना भाषा से अपनत्व बनवले राखे के.

राउर फिलिम कइसन होखीहें सँ ?
हम बस पइसा कमाए ला फिलिम बनावे नइखीं जात. हमार फिलिम बाकी फिलिमन से अलगा होखी, संदेशपरक होखी.

अबही रउरा का करत बानी ?
भोजपुरी के बेटा हईं. भोजपुरी के हर गतिविधि में आगे रहीलें. अबहीं अपना फिलिमन पर अधिका ध्यान देत बानी.


(संजय भूषण पटियाला)

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