अमूमन भोजपुरी हीरोइनन के अहमियत शो-पीस से बेसी कुछ ना होखे. मजबूरिये में सही बाकिर अभिनेत्री लोग एह हालात के नियति मान लिहले बा. बाकिर राखी त्रिपाठी हालात से समझौता कइला का बजाय ओकरा के बदलल चाहत बाड़ी.

बकौल राखी अगर हीरोइनन के शो-पीस वाला हालात में बदलाव नइखे आवत त एकर खामियाज़ा भोजपुरीए सिनेमा के उठावे पड़ी. सिनेमा के मिजाज़ आ अंदाज़ तेज़ी से बदलत बा, अब दर्शक अभिनेत्रियन के खाली डाँड़ मटकावत भा फेंड के टहनी पकड़ले गावत नइखे देखल चाहत. बलुक फिल्म के कहानी आ ओकरा ट्विस्ट अउर टर्नो में उनुकर पूरी भागीदारी चाहत बा.

कॉलेजे का समय से बागी सुभाव के रहल राखी त्रिपाठी ग्लैमर के कामयाबी के पैमाना माने के तइयार नइखी. उनुकर कहना बा कि कहानी के माँग पर ग्लैमर झमकवला से उनुका कवनो परहेज बाकिर जबरिया सिचुएशन ठूंस-ठेल के देह उघारे के चलन उनुका मंजूर नइखे. इहे ना, राखी एह इंडस्ट्री के कई अउरियो रिवाजन से इत्तेफाक ना राखसु. बावजूद एकरा उनुकर कामयाबी के सफर बिना रुकले जारी बा.

हालही में राखी त्रिपाठी के मैथिली फिल्म “सजना के अंगना में सोलह श्रृंगार” आ भोजपुरी फिल्म “अचल रहे सुहाग” कामयाबी के परचम फहरवलसि. एह फिल्मन के उदाहरण पेश करत राखी के कहना बा कि एह फिल्मन में परम्परा आ मूल्यन के तवज्जो दिहल गइल रहे आ तबहियो दर्शक एह फिल्मन के आपन भरपूर प्यार दिहले. एहसे ओह फिल्मकारन के आँख ज़रूर खुली जे सेक्स आ फूहड़पने के अपना सफलता के कुंजी मानत लकीर के फ़कीर बनल बाड़े.

आवे वाला समय में राखी त्रिपाठी ‘चुन्नुबाबू सिंगापुरी’, ‘काली’, ‘कोठा’, ‘चालबाज़ चुलबुल पांडेय’ अउर ‘जीजाजी की जय हो’ जइसन फिलिमन में नजर आवे वाली बाड़ी.


(स्पेस क्रिएटिव मीडिया के भेजल रपट)

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