अब भोजपुरी में बने जा रहल बा गुलाम

आमिर खान के मशहूर फिल्म गुलाम का बाद अब भोजपुरिओ में गुलाम बनावल जा रहल बा. भोजपुरी फिल्म गुलाम के कहानी अपने देश के दुश्मन बनल नक्सलियन माओवादियन समेत सामंती व्यवस्थो के निशाना पर लिहल जाई. फिल्म के निर्माण शंभू पांडे प्रोडक्शन का बैनर में हो रहल बा आ निर्देशित करत बाड़े रामपाल सिंह. फिल्म के प्रस्तुत करीहे मोहनदास.

पिछला दिने फिल्म के मुहुर्त शॉट सुपर स्टार विनय आनन्द आ खलनायक संजय पाण्डे पर लिहल गइल. ताली का गड़गड़ाहत का बीचे मशहूर निर्देशक राजकुमार पाण्डे स्टेज ओपन कइलन. साँवरिया आई लव यू का बाद शंभू पाण्डे आ विनय आनन्द के जोड़ी फेर एक साथ काम कर रहल बा. फिल्म में विनय आनन्द का साथे रानी चटर्जी, मोनालिसा, कल्पना शाह, संजय पाण्डे, अवधेश मिश्रा, नीरज भारद्वाज, आ अली खान के मुख्य भूमिका बा.


(स्रोत : शशिकान्त सिंह)

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2 Comments

  1. दिवाकरजी, नमस्कार। हम बहुत हद तक रउरी बात से सहमत बानी..आजकल भोजपुरी फिलिम में ना भोजपुरिया समाज,ना संसकृति लउकता ना भोजपुरी ही। आजकल भोजपुरी फिलिम फिल्म निर्माताओं खातिर सोने के मुर्गी बनि के रहि गइल बिया अउर एकर दोहन चालू बा। ए फिल्मन के भाषा भी भोजपुरी न होके भोजदीं (भोजपुरी-हिंदी) बा। अउर ए फिलिमन से भोजपुरिया समाज अउर भोजपुरी के बहुते नुकसान बा। भोजपुरी फिल्मन के पोस्टर आदि देखले की बाद अभोजपुरियन में एगो भोजपुरियन अउर भोजपुरिया समाज की परति गलत मानसिकता बनत चलि जाता, अभोजपुरी लोग ..हँसता ए पोस्टरन के देखि के। हमरा बुझाता जवनेगाँ अन्य छेत्रीय भाषा में कुछ फिलिम बनल बानीसन ओगां भोजपुरी में ना। हाँ कुछ अच्छा फिलम भी बननी कुलि पर एक-आध गो।
    हाँ एक बात अउर ए में हमरी खेयाल से भोजपुरियन के ही दोस बा। अगर ए बकबास फिल्मन के देखे खातिर भोजपुरिया लोग सिनेमाहालन में ना टूटित त सायद एइसन फिल्मन के निरमाने ना होइत। त सबसे कुसुरवार भोजपुरिए बाने..अउर एकबात अउर बेभ, पत्रिका आदि में भी अधिकत्तर भोजपुरिया गरम मसाला ही खोजताने।
    हाँ इहो सही बात बा की एही की चलते भोजपुरिया सिनेमा लवंडा-लफारी, रेक्सहा अउर मजदूरन से उठि नइखे पावत। हम रउरा के बता दीं की आज की समय में रउरां केहू भी विचारवान भोजपुरिया के भोजपुरी फिलिम देखत ना पा सकेनी।
    खैर ए में ना सिनेमा के दोस बा ना पत्रिकन के सब समय के माँग बा…जहिया इ माँग बदलि अपनी आपे सब ठीक हो जाई…बस अलख जगवले रहले के ताक बा।।।।।। जय भोजपुरी, जय भोजपुरिया समाज।।

  2. हमरा खातिर “भोजपुरी सिनेमा” के मतलब होला “टोटल बकवास”। हिन्दी सिनेमा के डी ग्रेड वर्जन भी कहल जा सकेला भोजपुरी सिनेमा के । गिनल-चुनल फिलिमन के बनवला के छोड़ दीं तऽ भोजपुरी सिनेमा उद्योग “फूहड़पन” के कारखाना कहल जा सकेला । पता ना तबो काहे अधिकांश भोजपुरी के समर्पित वेबसाइट अपना सामग्री के नब्बे प्रतिशत एही घटिया फिलिमन खातिर समर्पित कईले बाड़ी सन । हो सकतऽ बा कि वेबसाइट नियंत्रक लोगन के ई कवनो मजबूरी होखे। हमरा त इहे बुझाता कि नियंत्रक लोगन के ई मजबूरी के जड़ शायद हमनीं भोजपुरिया पाठक सभे ही बानीं जा। घटिया फिलिम चरचा के अलावे हमनीं जान के बुद्धि आऊर कहीं शायद लागत ना होई…..

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