khoichha-producer-krishneshwar-sharmaएल. के. प्रोडक्शन के बैनर तले बनल फिलिम ’खोईछा’ के निर्माता कृष्णेश्वर शर्मा रिटायर्ड शिक्षाविद् हउवें आ इनका शुरूए से गीत-संगीत से लगाव रहल बा. एही लगाव का चलते शर्मा जी भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री में कूद पड़ले आ ’खोईछा’ जइसन भोजपुरी माटी से लबरेज फिलिम बना डललन. एह फिलिम के चर्चा भोजपुरी सिने जगत में चारो ओर हो रहल बा. एहिजा उनका से भइल बातचीत के कुछ अंश दिहल जात बा.

प्रः शर्मा जी, का सोच के रउरा अपना फिलिम के टाइटल ’खोईछा’ रखनी?
उः खोईछा एगो सगुन ह जवना के सदियन से भारतीय समाज अपना बेटी बहु के बिदाई के बेरा देत आइल बा. भोजपुरी समाज में एकर खास महत्व बा. आजु आधुनिकता में एकर अनदेखी होखे लागल बा आ एही चलते सोचनी कि देखावल जाव खोईंछा के लाभ-हानि.

प्रः आज जब भोजपुरी सिनेमा अपना संक्रमण काल से गुजरत बा तब एह तरह के सामाजिक पारिवारिक फिलिम बनावल रिस्क ना बुझाइल का?
उः फिलिम परिवार आ समाज के धारा मोड़ देबे वाला सशक्त माध्यम ह. बाकिर जब निर्मते बहेंगवा हो जइहें त दर्शक त अपना के अन्हारे में पइहें. ओह लोग के रोशनी के जरूरत बा. आ ई रोशनी देखावल निर्माता लोग के कर्तव्य बनत बा. इहे सोच के खोईंछा बनावत हमरा रिस्क ना बुझाइल.

प्रः रउरा का उमेद बा कि ई फिलिम दर्शकन के सिनेमा हाल ले खींच ले आई?
उः ’खोईछा’ नारी के सिंगार ह, नइहर-ससुराल में दिहल जाएवाला अनुपम उपहार ह. जवन बहू-बेटी के सुख समृद्धि के द्योतक ह. एह खोंईछा क चलते सशक्त सिनेमा के टूटल मुख्य कड़ी औरत खुद बखुद सिनेमा घरन ले खींचात चलि अइहें. भोजपुरी के दर्शको अपना परम्परा आ संस्कृति से जुड़ल बात देखे आ सुने के लालसा राखेलें. एहसे हमरा त उमेद बा कि दर्शक जरूरे जुटीहें आ भरपूर जुटीहें.

प्र: एह बात के चर्चा खूबे बा कि आपके पत्नी ललितो शर्मा जी के एह फिलिम बनावे में बड़हन योगदान बा. का ई साँच बा?
उः हँ. कवनो पत्नी जब अपना पति के काम में सकारात्मक भूमिका अदा करेले त ऊ काम दुगुना रफ्तार से आगे बढ़ेला. ललोता जी हमरा के कदम-कदम पर साथ दिहली आ हमार उत्साह बढ़वली. संगही जितेन्द्र कुमार सुमन के विशेष पहल आ उनुकरो योगदान भुलावल ना जा सके.

प्र: आखिरी सवाल. आगे के योजना का बा?
उ: हमरा ला पइसो से अधिका कीमती बा अपना संस्कृति के रक्षा. फिलिम एकर सशक्त माध्यम हो सकेला. हमार योजना एह भरम के मेटावे के बा कि भोजपुरी फिलिम परिवार संगे देखे लायक ना होले. हम चाहब कि पति-पत्नि अपना लड़िकन के हाथ धइले सिनेमा घर के ओर चलसु आ सपरिवार भोजपुरी सिनेमा के आनंद लेसु.


(संजय भूषण पटियाला)

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